दिल्ली में सोमवार (20 जुलाई) को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन और प्रस्तावित संसद तक मार्च करने के दौरान खूब हंगामा देखा गया। शिक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन और मार्च ने देखते ही देखते आक्रमक रूप ले लिया।
Tear Gas Effects: आंसू गैस के गोले सेहत के लिए कितने खतरनाक? क्या होता है इसका असर
आंसू गैस वास्तव में गैस नहीं होती। अधिकतर मामलों में यह एक रासायनिक यौगिक होता है, जिसे छोटे-छोटे ठोस कणों या एरोसोल के रूप में हवा में फैलाया जाता है। क्या आप जानते हैं कि इसका हमारी सेहत पर क्या असर होता है?
आंसू गैस का इस्तेमाल
भीड़ को तितर-बितर करने, प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पहले भी कई प्रोटेस्ट के दौरान आंसू गैस का इस्तेमाल होता रहा है। नाम सुनकर ऐसा लगता है जैसे इसका काम केवल आंखों से आंसू निकालना हो, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा गंभीर है।
आंसू गैस केवल आंखों को नहीं, बल्कि नाक, गले, त्वचा और फेफड़ों तक को प्रभावित करती है। यही वजह है कि इसके संपर्क में आते ही व्यक्ति को तेज जलन, सांस लेने में कठिनाई, खांसी और घबराहट महसूस होने लगती है।
- दिलचस्प बात यह है कि आंसू गैस वास्तव में गैस नहीं होती। अधिकतर मामलों में यह एक रासायनिक यौगिक होता है, जिसे छोटे-छोटे ठोस कणों या एरोसोल के रूप में हवा में फैलाया जाता है।
- आंसू गैस के संपर्क में आने से होने वाली दिक्कतों से स्वस्थ व्यक्ति तो कुछ समय में ठीक हो जाता है, लेकिन जिन्हें अस्थमा, सीओपीडी, हृदय रोग है या फिर बच्चों-गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए इसका असर कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता है।
- कई वैज्ञानिक अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि बंद जगहों में या लंबे समय तक संपर्क रहने पर आंसू गैस गंभीर श्वसन समस्याएं, आंखों की चोट और त्वचा संबंधी जटिलताओं का कारण बन सकती है।
आंसू गैस के गोले क्या होते हैं और कैसे काम करते हैं?
आंसू गैस को आमतौर पर दंगा और प्रदर्शनों को नियंत्रण करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें आमतौर पर CS गैस (2-क्लोरोबेंजाल्माइनोनाइट्राइल) का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा क्लोरोएसीटोफेनोन और ओलेओरेसिन कैप्सिकम (सूखी लाल मिर्च से निकाला जाने वाला एक प्राकृतिक तैलीय पदार्थ) भी प्रयोग में लाए जाते हैं।
- आंसू गैस के गोले धातु के कंटेनर होते हैं। इन्हें दागे जाने पर इनके अंदर मौजूद रसायन गर्म होकर बेहद महीन कणों के रूप में हवा में फैल जाते हैं।
- ये कण आंखों, नाक, मुंह और त्वचा की नमी के संपर्क में आते ही तेज जलन पैदा करते हैं।
- इसका उद्देश्य भीड़ को तितर-बितर करना होता है, न कि स्थायी चोट पहुंचाना।
यदि सांस के साथ ये कण शरीर में चले जाएं तो इसका श्वसन मार्ग की परत पर असर होता है। इससे फेफड़ों की वायुमार्ग सिकुड़ सकती हैं। कुछ लोगों में सांस फूलने, सीने में जकड़न और घरघराहट हो सकती है। इसके संपर्क में आने पर आंखों में जलन-लालिमा की दिक्कतें भी बढ़ जाती हैं।
स्वास्थ्य पर क्या असर होता है?
आंसू गैस के संपर्क के कुछ सेकंड के भीतर आंखों में जलन, आंसू आने और आंखें खोलने में कठिनाई होने लगती है।
- नाक से पानी बहने, छींक, गले में जलन, लगातार खांसी और सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।
- त्वचा पर संपर्क होने पर लालिमा, जलन, खुजली और चुभन महसूस हो सकती है।
- अस्थमा, हृदय रोग, बुजुर्ग, छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाओं में इसके अधिक जोखिम देखे जाते रहे हैं।
अधिकांश लोगों में ये दिक्कतें थोड़े समय के लिए बनी रहती हैं। लेकिन पहले से सांस के मरीजों में दिक्कतें ज्यादा हो सकती हैं। हालांकि लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में बंद जगहों में इसके संपर्क में रहने से स्थायी नुकसान हो सकता है। इससे अंधेपन, ग्लूकोमा, आंखों पर निशान पड़ने, मोतियाबिंद और अस्थमा जैसी सांस की बीमारियों का खतरा हो सकता है।
आंसू गैस के संपर्क में आने पर क्या करें?
आंसू गैस के संपर्क में आते ही उस क्षेत्र से हटकर ताजी हवा वाली जगह पर ले जाएं। आंखों को साफ पानी से लगातार 10-15 मिनट तक धोएं। आंखें रगड़ने से बचें क्योंकि इससे जलन बढ़ सकती है।
यदि कपड़ों पर रसायन लगा हो तो उन्हें सावधानी से उतारें और त्वचा को साबुन व पानी से धोएं। कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोग उन्हें तुरंत निकाल दें और दोबारा इस्तेमाल न करें। यदि सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, बेहोशी या अस्थमा का गंभीर अटैक हो तो तुरंत अस्पताल जाएं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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