हाई कोलेस्ट्रॉल मौजूदा समय की सबसे आम समस्याओं में से एक है। वयस्क हों या बुजुर्ग यहां तक कि 20 से कम उम्र के लोगों में भी कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत देखी जा रही है। कोलेस्ट्रॉल का स्तर अक्सर सामान्य से अधिक बने रहना हृदय की गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
Cholesterol: बहुत कॉमन है कोलेस्ट्रॉल की समस्या पर इसके बारे में कितना जानते हैं आप? जानिए कुछ मिथ्स-फैक्ट्स
कोलेस्ट्रॉल का स्तर अक्सर सामान्य से अधिक बने रहना हृदय की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। हम सभी रोज कोलेस्ट्रॉल के बारे में सुनते-पढ़ते रहते हैं पर क्या आप वास्तव में कोलेस्ट्रॉल से परिचित हैं। आइए कुछ ऐसे ही मिथ्स के बारे में जानते हैं जिन्हें अक्सर लोग सही मानते रहे हैं।
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मिथ: कोलेस्ट्रॉल मतलब सेहत के लिए खतरा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल का नाम सुनते ही सबसे पहला ख्याल यही आता है कि कोलेस्ट्रॉल मतलब सेहत के लिए खतरा। पर वास्तव में कोलेस्ट्रॉल इतना भी बुरा नहीं है।
कोलेस्ट्रॉल दो प्रकार का होता है- बैड और गुड। गुड कोलेस्ट्रॉल शरीर की कोशिकाओं, हार्मोन (जैसे एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन) और विटामिन-डी के निर्माण में मदद करता है। संतुलित मात्रा में कोलेस्ट्रॉल शरीर के सुचारू कार्य के लिए आवश्यक होता है। हालांकि अगर इसकी मात्रा अक्सर सामान्य से अधिक बनी रहता है तो निश्चित ही ये सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
मिथ- मांसाहारी लोगों को कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत ज्यादा होती है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन का कहना है कि भोजन से प्रतिदिन 300 मिलीग्राम से कम कोलेस्ट्रॉल प्राप्त करना चाहिए। संतृप्त वसा यानी सैचुरेटेड फैट इसका बड़ा कारण माना जाता है। रेड मीट, मक्खन और फुल फैट वाले डेयरी उत्पाद में सैचुरेटेड फैट की अधिकता होती है। एक अंडे में 186 मिलीग्राम तक कोलेस्ट्रॉल और सिर्फ 1.6 ग्राम सैचुरेटेड फैट होता है।
शाकाहारी हो या मांसाहारी किसी को भी कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत हो सकती है इसलिए आहार को लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
मिथ- कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है तो ये सिर्फ दवा से ठीक होगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोलेस्ट्रॉल को चूंकि हृदय रोगों और हार्ट अटैक का कारण माना जाता रहा है इसलिए अक्सर लोग चिंतित रहते हैं। कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए आपको दवाओं का जरूरत होती है पर अगर ये बहुत ज्यादा नहीं है और आपको हार्ट से संबंधित बीमारियां नहीं हैं तो जीवनशैली में बदलाव से भी लाभ मिल सकता है।
दवाओं के साथ-साथ स्वस्थ खान-पान, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन की मदद से भी कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है।
मिथ- केवल 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को कोलेस्ट्रॉल की जांच करवानी चाहिए।
डॉक्टर बताते हैं कि कोलेस्ट्राल की समस्या किसी को भी हो सकती है इसलिए वयस्कों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को हर 5 साल में कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए।
45 से 65 वर्ष की आयु के पुरुषों और 55 से 65 वर्ष की आयु की महिलाओं को हर एक साल में इसकी जांच करानी चाहिए। 65 वर्ष की आयु के बाद छह-आठ माह में इसका टेस्ट कराएं। यदि आपका कोलेस्ट्रॉल हाई रहता है अपने डॉक्टर से इसके बारे में पूछें और बताए गए उपायों का पालन करते रहें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।