वजन बढ़ने की समस्या कई गंभीर और क्रोनिक बीमारियों को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। यही कारण है कि सभी लोगों को अपने वजन को कंट्रोल में रखने की सलाह दी जाती है। पर क्या वजन कम करना वास्तव में इतना आसान है?
Weight Loss: अब वजन घटाना कठिन काम नहीं, चैटजीपीटी और एआई बताएगी- कौन से उपाय आपके लिए सबसे बेहतर?
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11.7 किलो तक वजन कम किया वजन
हालिया मीडिया रिपोर्ट्स में ग्रेग मुशेन नाम के व्यक्ति की चर्चा है जिसने चैटजीपीटी द्वारा बनाई गई डाइट प्लान के माध्यम से 11.7 किलो तक वजन कम किया है। डाइट प्लान और दिनचर्या के लिए चैटजीपीटी द्वारा बनाई गई योजना में दिन में मध्यम स्तर की रनिंग और वॉकिंग के साथ आहार में कुछ सामान्य से बदलावों को लेकर सुझाव दिया गया था।
चैटजीपीटी और एआई जैसी तकनीक द्वारा सुझाए गए डाइट प्लान को कई क्रोनिक बीमारियों के जोखिमों को कम करने में सहायक होने का भी अनुमान है।
कितने प्रभावी होंगे एआई द्वारा बताए गए प्लान?
अब सवाल यह है कि डाइट प्लान संबंधी सलाह देने में यह तकनीक कितनी प्रभावी है? इसको लेकर शोधकर्ताओं की टीम ने उपभोक्ता सर्वेक्षण किया। इसमें पांच में से तीन उपभोक्ता सहमत थे कि यह कारगर हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई न सिर्फ स्वस्थ आहार को लेकर सलाह देने में मदद कर सकती है, साथ ही यह भी बता सकती है कि कौन सी चीजें आपकी सेहत के लिए लाभकारी हैं और क्या नहीं खाना चाहिए?
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
कनाडा में शिक्षाविदों ने नेचुरल लैग्वेज प्रोसेसिंग (एनएलपी) नामक एक विशिष्ट प्रकार के एआई का उपयोग किया। इसको लेकर किए गए अध्ययन में पाया गया कि खाद्य उत्पादों को मैन्युअल रूप से वर्गीकृत करने के लिए आवश्यक समय को कम करने में प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा सकता है।
इससे पहले आहार संबंधी सलाह के लिए चैट जीपीटी का उपयोग करने वाली विशेषज्ञ समीक्षाओं ने इसके मिले-जुले परिणाम दिए हैं। एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए आहार योजना तैयार करने की चैटबॉट की क्षमता का आकलन करने के लिए किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि यह लोगों की सेहत के आधार पर डाइट प्लान दे सकती है, जो न सिर्फ वजन कम करने में मदद करेगी साथ ही आहार में गड़बड़ी के कारण बढ़ रही वैश्विक स्तर पर क्रोनिक बीमारियों के खतरे को भी इससे कम किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का अनुमान है, तकनीकी और प्रौद्योगिकी का उपयोग स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर परिणामों वाला हो सकता है। चैटजीपीटी और एआई के माध्यम से इसमें लाभ मिलने की संभावना है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।