डॉ अल्केश जैन
Medically reviewed by Dr. Alkesh Jain
Char Dham Yatra 2022: Devotees Dies of Heart Attack: भारत की चार धाम यात्रा दुर्गम और दुर्लभ यात्रा में से हैं, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए जाते हैं। पहाड़ों पर स्थित चार धाम मंदिर के दर्शन के लिए भक्त पथरीले और ऊंचे उबड़ खाबड़ मार्गों से होते हुए जाते हैं। भक्तों की आस्था और विश्वास चार धाम यात्रा से जुड़ी है लेकिन यहां जाने का मार्ग कठिन होने के कारण कई लोगों को चार धाम की चढ़ाई करने में शारीरिक स्तर पर समस्याएं आती हैं। हाल ही में चार धाम यात्रा पर गए कई यात्रियों की मौत हो गई। यात्रियों की मौत का कारण हार्ट अटैक था। छह दिन में 20 तीर्थयात्रियों की मौत हार्ट अटैक से हुई है। यात्रा के दौरान बीमार और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की जान को भी खतरा रहता है। कमजोर हृदय के मरीजों के साथ ही कई अन्य बीमारियों के कारण भी तीर्थयात्रियों में जान का खतरा बना रहता है। विशेषज्ञ से जानें चार धाम की कठिन यात्रा में किन बीमारियों से ग्रसित तीर्थयात्रियों को ज्यादा खतरा है और हृदय रोगियों के लिए चार धाम की यात्रा क्यों कठिन हैं?
चारधाम यात्रा में हार्ट अटैक से 15 की मौत: हार्ट पेशेंट जरूर ध्यान रखें डॉक्टर की ये सलाह
तीर्थयात्रियों के लिए डाॅक्टर की सलाह
मेदांता अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ अल्केश जैन के मुताबिक आजकल जो व्यक्ति अधिक उम्र के हैं या उन्हे पहले से हार्ट की बीमारी है, अगर वह हिल स्टेशन पर छुट्टियां मनाने की योजना बना रहे हैं या फिर चार धाम यात्रा व किसी ऊंचाई वाली जगह पर धार्मिक यात्रा पर जाने वाले हैं, उनको जरूरी स्वास्थ्य जांच करा लेनी चाहिए। यात्रा से पहले हृदय की या जो भी हृदय से जुड़ी जाचें जैसे ब्लड प्रेशर, शुगर की जांच कराकर ही जाएं। क्योंकि अगर तीर्थयात्री को कोई अंदरूनी बीमारी है और वह यात्रा के दौरान अधिक थकान होने पर हार्ट अटैक होने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में इन जगहों पर जाने से पहले रेगुलर जांच जिसमें इको टीएमटी जांच, खून की जांच और ईसीजी कराकर ही जाएं और अपने आप को सुरक्षित रखें।
हार्ट अटैक या हृदयाघात कब हो सकता है?
जब शरीर की नसों में खून का प्रवाह सुचारू रूप से नहीं हो पाता और खून जमने (क्लॉटिंग) लगता है। इसके कारण रक्त हृदय तक नहीं पहुंच पाता और साथ ही हृदय को ऑक्सीजन मिलना भी बंद हो जाती है। इस स्थिति में हार्ट अटैक आता है। हार्ट अटैक की स्थिति व्यक्ति के लिए जानलेवा हो सकती है। लेकिन तुरंत उपचार मिलने से मरीज को बचाया जा सकता है।
दिल का दौरा पड़ने के कारण
हृदय घात के जोखिम कारकों में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अधिक वजन, हाई कोलेस्ट्रॉल, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और चिंता शामिल है।
दिल का दौरा पड़ने के लक्षण
- कोल्ड स्वेट यानी शरीर से पसीना तो आता है लेकिन ठंड भी लगती है।
- पीड़ित को थकान महसूस होने लगती है।
- सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।
- शरीर का भार कम महसूस होने लगता है।
- चक्कर आ सकते हैं।
- बाएं हाथ में दर्द महसूस होने लगता है।
- अपच की समस्या या उल्टी महसूस होने लगती है।
- सीने में जलन होने लगती है।