इन दिनों मौसम में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है। दिन में बढ़ा हुआ तापमान और सुबह-शाम की हल्दी सर्दी लोगों को बीमार कर रही है। मौसम के करवट लेते ही लोग वायरल फीवर की चपेट में आने लगे हैं। गले में खराश, छींक आने, नाक बंद होने और हल्के बुखार की शिकायत लेकर लोग अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। कहीं आप भी इस तरह की समस्याओं का शिकार नहीं हो गए हैं?
Alert: मौसम बदलते ही बिगड़ने लगी लोगों की सेहत, कहीं आपको भी न हो जाए वायरल बुखार? जानिए कैसे बचें
मौसम में अचानक बदलाव वायरल संक्रमण का मुख्य कारण होता है। तापमान में उतार-चढ़ाव वायरस के जीवित रहने और फैलने के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। इसके अलावा कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना, भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाना और स्वच्छता की कमी भी संक्रमण का खतरा बढ़ाती है।
ओपीडी में बढ़े वायरल संक्रमण वाले मरीज
अमर उजाला से बातचीत में जनरल फिजिशियन डॉ अरविंद शर्मा बताते हैं, बीते एक हफ्ते से ओपीडी में वायरल संक्रमण और बुखार के साथ आने वाले मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है।
वायरल फीवर में तेज बुखार, शरीर में दर्द-सिरदर्द, कमजोरी, खांसी, गले में खराश और नाक बहने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ मामलों में थकान और भूख कम लगना भी आम होता है। ये लक्षण आमतौर पर 3 से 7 दिनों तक रह सकते हैं।
तेज बुखार, गले में संक्रमण और दवाओं के असर के कारण स्वाद और गंध की क्षमता अस्थायी रूप से कमजोर हो सकती है। अधिकांश मरीजों में यह समस्या दो-तीन दिन में ठीक हो जाती है लेकिन कुछ मरीजों ऐसे भी हैं, जो स्वस्थ होने के बाद फिर बुखार की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे मरीजों में कमजोरी अधिक देखने को मिल रही है।
मौसम बदलते ही क्यों बढ़ने लगती है बीमारी?
डॉ अरविंद कहते हैं, मौसम में अचानक बदलाव वायरल संक्रमण का मुख्य कारण होता है। तापमान में उतार-चढ़ाव वायरस के जीवित रहने और फैलने के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। इसके अलावा कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना, भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाना और स्वच्छता की कमी भी संक्रमण का खतरा बढ़ाती है।
- बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को वायरल संक्रमण का खतरा अधिक होता है।
- इसके अलावा, जिन लोगों को डायबिटीज, अस्थमा या अन्य क्रॉनिक बीमारियां हैं, उन्हें भी सावधान रहने की जरूरत होती है।
कैसे फैलता है वायरल संक्रमण?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायरल फीवर के लिए इन्फ्लूएंजा वायरस को मुख्यरूप से जिम्मेदार माना जाता है।
- यह संक्रमण आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, खांसने-छींकने से निकलने वाली बूंदों, दूषित सतह को छूने से फैलता है।
- मानसून और सर्दियों में वायरल फीवर के मामले अधिक बढ़ जाते हैं क्योंकि इस दौरान वायरस तेजी से फैलते हैं।
- गर्भवती महिलाओं में संक्रमण का खतरा अधिक होता है क्योंकि इस दौरान शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव होता है।
वायरल फीवर के लक्षण और बचाव
वायरल फीवर के कारण आमतौर पर लोगों को बुखार की दिक्कत होती है। इसके साथ शरीर में दर्द, सिरदर्द, कमजोरी और थकान महसूस होती है। कई लोगों को ठंड लगने, पसीना आने और मांसपेशियों में दर्द की भी दिक्कत होती है। यदि बुखार 3 से अधिक दिनों तक बना रहे, सांस लेने में कठिनाई हो या बहुत अधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
- वायरल फीवर से बचाव के लिए इम्यून सिस्टम को मजबूत करना और अच्छी स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण हैं।
- वायरस संक्रमण को रोकने के लिए हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखें और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनें।
- संतुलित आहार जिसमें फल, सब्जियां, प्रोटीन और विटामिन्स वाली चीजें शामिल हों, ये इम्युनिटी को मजबूत बनाती हैं।
- पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी इम्युनिटी बढ़ाकर संक्रमण से बचाव में मदद करते हैं।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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