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सेहत की बात: जानलेवा हो सकती है हृदय गति की असामान्यता, जानिए इसके कारण और बचाव के असरदार तरीके

Mon, 14 Feb 2022 03:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 14 Feb 2022 03:41 PM IST
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causes of low irregular heart beat, heart rate abnormalities complications
हार्ट रेट का बढ़ना हो सकता है नुकसानदायक - फोटो : pixabay

Medically Reviewed by-


डॉ नरेश भार्गव
(वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट)
गुरुग्राम



पिछले एक दशक में वैश्विक स्तर पर हृदय रोग के मामलों में तेज उछाल देखने को मिला है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई कारकों को इसके लिए जिम्मेदार मानते हैं, जिसमें जीवनशैली और आहार की गड़बड़ी सबसे प्रमुख है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों पर गौर करें तो हृदय रोग वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। हृदय के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए हमें हार्ट रेट पर विशेष ध्यान देने की आश्यकता है। हृदय गति वह पैमाना है जिसके आधार पर यह मापा जाता है कि एक मिनट के भीतर हमारा दिल कितनी बार धड़कता है? 60-100 बार की धड़कन को सामान्य माना जाता है। इसमें कमी या अधिकता गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की ओर संकेत हो सकता है। 

हार्वर्ड स्कूल ऑफ मेडिसिन के अनुसार, आराम करते समय हमारा हार्ट रेट कितना रहता है, यह भी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को परिभाषित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मार्कर माना जाता है। आमतौर पर रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने जैसे कारकों के चलते यह प्रभावित हो सकता है। इस बारे में सभी लोगों को विशेष सावधान रहना चाहिए।

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हृदय गति को रखें सामान्य - फोटो : iStock

सामान्य हृदय गति क्या है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक उम्र और स्वास्थ्य स्थितियों के आधार पर सामान्य हृदय गति में अंतर हो सकता है। आराम की अवस्था में वयस्कों का दिल सामान्यतौर पर एक मिनट में 60 से 100 धड़कता है। 59 से नीचे को लो हार्ट रेट माना जाता है। वहीं आराम करते समय हृदय गति का 100 से अधिक होना हृदय रोग के जोखिम का संकेतक हो सकता है। यही कारण है कि सभी लोगों को अपनी हृदय गति पर ध्यान रखना चाहिए।

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हार्ट रेट बढ़ने के क्या कारण होते हैं? - फोटो : Pixabay

हृदय गति बढ़ने के क्या कारण हो सकते हैं ?
हृदय रोग विशेषज्ञों के मुताबिक हार्ट रेट का बढ़ना या कम होना दोनों खतरनाक हैं। प्रति मिनट 100 से अधिक बार दिल का धड़कना अगर लगातार जारी है तो इसे कई गंभीर समस्याओं का संकेत माना जा सकता है। इस बारे में विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। 

  • संक्रमण या बुखार के कारण।
  • कार्डियोमायोपैथी जैसे हृदय रोग।
  • शरीर में पोटेशियम की कमी (हाइपोकैलिमिया)
  • खून की कमी
  • थायरॉयड ग्रंथि का अतिसक्रिय होना। 
  • दमा या सांस की समस्या।
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हृदय की सेहत का रखें ख्याल - फोटो : Pixabay

क्या कहते हैं हृदय रोग विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में, वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ नरेश भार्गव बताते हैं, कोरोना के इस दौर में हृदय की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ा है। डेल्टा जैसे वैरिएंट से संक्रमण के बाद हृदय गति बढ़ने और इसके कारण  हृदय या फेफड़ों के ऊतकों में सूजन की समस्या अधिक देखने को मिल रही है। इसके कारण दिल का दौरा पड़ने, स्ट्रोक जैसे गंभीर जानलेवा समस्याओं का जोखिम भी कई गुना बढ़ गया है। हृदय गति पर ध्यान रखें और इसे नियंत्रित रखने के प्रयास करते रहने चाहिए।

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दिल की सेहत का रखें ख्याल - फोटो : iStock

हृदय गति को कैसे नियंत्रित रखें?
डॉ नरेश बताते हैं, हृदय गति को सामान्य बनाए रखने के लिए जीवनशैली को स्वस्थ रखना बहुत आवश्यक है। इन 4 चीजों को ध्यान में रखकर हृदय गति को नियंत्रित में रखने के साथ कई तरह की हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम कर सकते हैं। 

  • नियमित व्यायाम करें।
  • तनाव कम लें और इसे प्रतिबंधित करने के उपाय करें।
  • तंबाकू उत्पादों से परहेज करें।
  • वजन को नियंत्रित रखें, इसे बढ़ने से रोकने के उपाय करें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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