कोरोना वायरस के चलते लगभग एक साल से ज्यादातर लोग वर्क फ्रॉम होम के माध्यम से काम कर रहे हैं। दिन में एक लंबा वक्त अकेले काम करते करते गुजारने के कारण अब इसके कई सारे दुष्प्रभाव भी देखने को मिल रहे हैं। बाइपोलर डिसऑर्डर के तेजी से सामने आ रहे मामले इसी का उदाहरण हैं। बाइपोलर डिसऑर्डर को गहरे अवसाद के रूप में भी जाना जाता है, यह एक ऐसी मानसिक समस्या है जिसमें रोगी को अत्यधिक मूड स्विंग होने की शिकायत होती है। सरल भाषा में समझें तो रोगी एक पल खुशी जबकि अगले ही पल बहुत ही ज्यादा दुख का अनुभव कर सकता है। कुछ लोगों को बहुत ज्यादा व्याकुलता का भी अनुभव हो सकता है।
कहीं आप भी तो इस प्रकार के लक्षण महसूस नहीं कर रहे हैं? अगर हां तो सावधान हो जाएं। आइए इस लेख में जानते हैं कि इस प्रकार की समस्याओं से परेशान लोग क्या कर सकते हैं?
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- फोटो : social media
सबसे पहले यह जान लेना आवश्यक हो जाता है कि आखिर बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्या होती क्यों है, साथ ही सामान्य रूप से इसे कैसे पहचाना जा सकता है? इस बारे में लखनऊ स्थित मनोरोग विशेषज्ञ डॉ आदर्श विश्वकर्मा का कहना है कि सामान्य रूप से हम इसे तनाव के रूप में देखते हैं लेकिन बाइपोलर डिसऑर्डर इतना भी सामान्य नहीं है। लोगों से मिल ना पाने और एक कमरे में बंद रहकर लगातार काम करते रहने के कारण इस तरह के मामले फिलहाल ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। बाइपोलर डिसऑर्डर में व्यक्ति ज्यादातर कामों से अपने रुचि खो देता है। कई बार वह खुद को असमर्थ महसूस करने लगता है, ऊर्जा की कमी का अनुभव होता है। हालांकि अगले ही पल उसे खुश भी देखा जा सकता है। ऐसे लक्षणों के दिखते ही डॉक्टर से सलाह जरूर ले लेना चाहिए।
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वर्क फ्रॉम होम
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क्यों होती है यह समस्या
वैसे तो बाइपोलर डिसऑर्डर किन कारणों से होता है इस बारे में डॉक्टरों को स्पष्ट जानकारी नहीं है। हालांकि मस्तिष्क में कुछ भौतिक बदलाव, रसायनिक असंतुलन और आनुवांशिकता को इस मानसिक बीमारी का कारक माना जा सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
बाइपोलर डिसऑर्डर से कैसे करें बचाव
विशेषज्ञों के मुताबिक समय रहते लक्षणों की पहचान कर डॉक्टरी सलाह लेकर इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। जिन लोगों को इस प्रकार के लक्षणों का अनुभव हो रहा हो उन्हें शराब और स्वयं से ही किसी दवा के सेवन से बचना चाहिए। बिना किसी डॉक्टर के सलाह के दवाओं का सेवन न करें।