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Heart Attack: शोध- ऐसी महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा अधिक, ज्यादातर को पता ही नहीं है बचाव का तरीका

Tue, 07 May 2024 06:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 07 May 2024 06:55 PM IST
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cardiovascular disease risk in women study says women who suffered heart disease were obese
हृदय रोगों का खतरा - फोटो : istock

हृदय रोग और हार्ट अटैक को दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। अध्ययन बताते हैं कि वैसे तो पुरुष-महिला दोनों में हृदय रोगों का जोखिम अधिक होता है पर महिलाओं की तुलना में पुरुषों में हार्ट अटैक के मामले अधिक देखे जाते रहे हैं। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन में पीजीआई चंडीगढ़ के हृदय रोग विभाग के डॉक्टरों ने बड़ा दावा किया है।



मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. नीलम दहिया ने सावधान करते हुए बताया है कि मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में हृदय रोग-हार्ट अटैक का खतरा अधिक हो सकता है। जिन महिलाओं का वजन सामान्य से अधिक है उन्हें हृदय की सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहना चाहिए।

अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक हृदय रोग से पीड़ित 44 प्रतिशत महिलाओं में मोटापे को प्रमुख जोखिम कारक पाया गया है। तीन वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, हृदय रोगों से पीड़ित महिलाओं में पुरुषों की तुलना में लक्षण भी अधिक गंभीर देखे गए हैं। इसके अलावा हृदय रोगों से पीड़ित 13-15 प्रतिशत महिलाएं 50 वर्ष से कम उम्र की थीं।

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मोटापे के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : istock

महिलाओं में हृदय रोगों का बढ़ता खतरा

प्रोफेसर नीलम बताती हैं, अधिक वजन की समस्या को पहले से हृदय रोगों का प्रमुख कारक माना जाता रहा है। इस अध्ययन में भी मोटापे को आधे से ज्यादा हृदय रोगों से पीड़ित महिलाओं में प्रमुख जोखिम कारक पाया गया है। इनमें से केवल एक फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जिनका आहार हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा (पर्याप्त फल और सब्जियां) माना जा सकता है। 

सबसे चिंताजनक बात ये है कि ज्यादातर महिलाओं में हृदय रोग और इससे संबंधित जोखिम कारकों के बारे में भी जागरूकता भी कम देखी गई है।

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अधिक वजन और हृदय रोगों का जोखिम - फोटो : istock

धूम्रपान और नमक की अधिकता बढ़ा रही है खतरा

अध्ययन में डॉक्टरों ने कहा धूम्रपान और अधिक मात्रा में नमक के सेवन को भी हृदय रोगों को बढ़ाने वाले कारकों के रूप में जाना जाता है। हालांकि केवल 47 प्रतिशत महिलाओं को नमक का सेवन कम करने और 30 प्रतिशत से कम को धूम्रपान छोड़ने और स्वस्थ आहार लेने का सुझाव दिया गया। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा ये आंकड़े महिलाओं में हृदय रोग के जोखिमों के बारे में जागरूकता पैदा करने और इसके बढ़ते खतरे से निपटने के लिए निवारक उपाय करने की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डालते हैं। अगर समय रहते इसपर ध्यान न दिया गया तो ये बड़े स्वास्थ्य जोखिम के तौर पर उभरने वाली समस्या हो सकती है।

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हृदय रोगों के जोखिम कारक - फोटो : istock

कम उम्र की महिलाओं में भी देखा जा रहा है जोखिम 

अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक हृदय रोगों से पीड़ित 10 प्रतिशत महिलाएं 40 से कम उम्र की हैं। यह और भी चिंताजनक स्थिति है। मोटापे के अलावा युवाओं में बढ़ते तनाव की स्थिति को भी भारत में हृदय रोग के प्रमुख खतरों में से एक पाया गया है। व्यस्त जीवनशैली और बढ़ती आपसी प्रतिस्पर्धी ने तनाव की समस्या को भी बढ़ा दिया है जिसके कारण कम आयु के लोग भी हृदय स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे हैं। 

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हृदय स्वास्थ्य का रखें ध्यान - फोटो : istock

अध्ययन का निष्कर्ष?

अध्ययन के निष्कर्ष से पता चलता है कि भारतीय लोग नमक और चीनी अधिक खाते हैं जबकि इसकी तुलना में सब्जियों और फलों का सेवन कम करते हैं। कार्ब्स, कैलोरी, मीठी चीजें और ट्रांस फैट के कारण मोटापा बढ़ रहा है। इसके अलावा लंबे समय तक बैठे रहने और शारीरिक सक्रियता में कमी के कारण भी वजन बढ़ने का खतरा हो सकता है जो सीधे तौर पर हृदय रोगों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। सभी लोगों को कम उम्र से ही वजन कम करने और हृदय स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए प्रयास करते रहने की सलाह दी गई है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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