स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम प्रकार के कैंसर में से एक है, जिससे हर साल लाखों मौतें हो जाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल इस कैंसर के 24 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं और 6.94 लाख से अधिक महिलाएं मौत का शिकार होती हैं। समय रहते जांच हो जाए तो इसका इलाज और बीमारी के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
ब्रेस्ट कैंसर: कैंसर का पता लगाने के लिए होने वाला टेस्ट कितना भरोसेमंद? सामने आ गई सच्चाई
मेमोग्राफी ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान का महत्वपूर्ण टेस्ट है, लेकिन इसके जरिए सामने आने वाली कुछ असामान्य स्थितियों को लेकर ओवरडायग्नोसिस की बहस रही है। नए शोध में इस जोखिम का अनुमान पुराने आकलनों से काफी कम पाया गया है। इससे ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग को समझने की चर्चा फिर तेज हो गई है।
कैंसर स्क्रीनिंग की दुनिया में एक दूसरी चर्चा भी लगातार होती रही है, क्या जांच से सामने आने वाली हर असामान्य कोशिका या ट्यूमर भविष्य में खतरनाक बीमारी बनेगा?यहीं से ओवरडायग्नोसिस की चर्चा शुरू होती है। अब एक अहम शोध ने इस मुद्दे को नए आंकड़ों के साथ फिर चर्चा में ला दिया है। शोधकर्ताओं के निष्कर्ष पुराने अनुमानों से काफी अलग हैं। आखिर नया अध्ययन क्या बताता है और इसका महिलाओं के लिए क्या मतलब है?
मेमोग्राफी से कैंसर की ओवरडायग्नोसिस का खतरा 5% से कम
- शोध में सामने आया है कि मेमोग्राफी से कैंसर के ओवरडायग्नोसिस का खतरा पहले लगाए गए 30 से 50% तक के अनुमानों से काफी कम होकर महज 5% ही रह गया है।
- मेमोग्राफी से ब्रेस्ट कैंसर की जांच में ऐसे कैंसर भी पकड़ में आने की संभावना रहती है, जो महिला की पूरी जिंदगी में कभी लक्षण या गंभीर बीमारी का कारण नहीं बनते। इसे ओवरडायग्नोसिस कहा जाता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न डेनमार्क का अध्ययन अमेरिका के प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ द नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट में प्रकाशित किया गया है। इसमें शोधकर्ताओं ने मेमोग्राफी से जुड़े आठ प्रमुख पुराने मामलों का दोबारा विश्लेषण किया।
शोधकर्ताओं ने इन अध्ययनों के आंकड़ों की तुलना डेनमार्क के फ्यूनन क्षेत्र के नियमित ब्रेस्ट-कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम के आंकड़ों से की। डेनमार्क में अलग-अलग क्षेत्रों में स्क्रीनिंग अलग-अलग समय पर शुरू हुई थी। इससे यह देखने का मौका मिला कि स्क्रीनिंग शुरू होने के बाद कैंसर के मामलों में शुरुआती बढ़ोतरी और बाद में होने वाले बदलाव किस तरह सामने आते हैं।
कैंसर के मामले बढ़ना हमेशा ओवरडायग्नोसिस का संकेत नहीं
शोध के मुताबिक स्क्रीनिंग शुरू होने पर कैंसर के मामले बढ़ना जरूरी नहीं कि ओवरडायग्नोसिस का संकेत हो। कई कैंसर ऐसे होते हैं जो बिना स्क्रीनिंग के भी कुछ साल बाद सामने आते हैं। अगर अध्ययन का फॉलोअप जल्दी खत्म हो जाए तो इन कैंसरों को गलती से ओवरडायग्नोसिस माना जा सकता है।
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स्रोत:
Breast cancer overdiagnosis in mammography trials—separating signal from noise: a meta-analysis Get access Arrow
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