ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में कैंसर का ख्याल आ जाता है, लेकिन हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होता। कुछ ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ते हैं और शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलते, जबकि कुछ तेजी से बढ़ने वाले और गंभीर हो सकते हैं।
सेहत की बात: आखिर कैसे बन जाता है ब्रेन में ट्यूमर, किन्हें इसका ज्यादा खतरा? यहां जानिए सबकुछ
Brain Tumor: ब्रेन ट्यूमर के ज्यादातर मामलों में सटीक कारण पता नहीं होता। उम्र, रेडिएशन और कुछ आनुवंशिक बीमारियां ट्यूमर का खतरा बढ़ा सकती हैं। वहीं शरीर के दूसरे हिस्से का कैंसर भी ब्रेन तक फैल सकता है।
ब्रेन ट्यूमर का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, उम्र बढ़ने के साथ आपमें ब्रेन ट्यूमर का खतरा भी बढ़ने लगता है। जो लोग अक्सर रेडिएशन का संपर्क में रहते हैं या परिवार में पहले से किसी को ट्यूमर रहा है उनमें इसका जोखिम अधिक देखा जाता है। कई मामलों में शरीर के किसी दूसरे हिस्से का कैंसर भी कभी-कभी ब्रेन तक फैल सकता है। इसलिए जोखिमों को समझना जरूरी है।
- ब्रेन में बनने वाले ज्यादातर प्राइमरी ट्यूमर सीधे ब्रेन या उसके आसपास के ऊतकों से शुरू होते हैं, उनका सटीक कारण पता नहीं चल पाता।
- कोशिकाओं के डीएनए में होने वाले बदलाव के कारण खतरा बढ़ जाता है और वे असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं। इसलिए ब्रेन ट्यूमर होने के लिए किसी एक आदत को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
उम्र बढ़ने के साथ ट्यूमर का खतरा
ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन कुछ प्रकार के ट्यूमर उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा देखे जाते हैं। बच्चों में कुछ अलग प्रकार के ब्रेन ट्यूमर ज्यादा पाए जाते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि उम्र बढ़ने के साथ हर व्यक्ति हाई रिस्क में है, बल्कि अलग-अलग ट्यूमर के लिए उम्र का असर अलग हो सकता है।
- रेडिएशन कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव कर सकती है, इसलिए इससे ब्रेन ट्यूमर का खतरा अधिक हो सकता है।
- कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रेडिएशन भी खतरनाक हो सकता है।
आनुवंशिक स्थितियां जो जीन में बदलाव के कारण परिवारों में चल सकती हैं, उनसे भी ब्रेन ट्यूमर का खतरा देखा जाता है। इनमें न्यूरोफाइब्रोमेटोसिस, ट्यूबरस स्क्लेरोसिस, वॉन हिप्पल-लिंडाउ और ली-फ्रॉमेनी जैसे सिंड्रोम शामिल हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर फैमिली हिस्ट्री और जरूरत के अनुसार आनुवंशिक सलाह की सलाह दे सकते हैं।
शरीर के दूसरे कैंसर से भी ब्रेन को खतरा
ब्रेन में बनने वाला हर ट्यूमर ब्रेन से शुरू नहीं होता। फेफड़े, स्तन, त्वचा या शरीर के दूसरे हिस्सों में शुरू हुआ कैंसर कभी-कभी रक्त के रास्ते ब्रेन तक पहुंच सकता है। इसे सेकेंडरी या मेटास्टेटिक ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है। इसलिए जिस व्यक्ति को पहले से कैंसर है, उसमें नए न्यूरोलॉजिकल लक्षणों पर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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