शरीर में कुछ भी असामान्य नजर आने को हल्के में लेना आपके लिए बड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। त्वचा के रंग में बदलाव पर विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है। कई बार इसके आधार पर गंभीर बीमारियों का शुरुआत में ही पता लगाकर बड़ी समस्याओं से बचाव किया जा सकता है। डॉक्टर्स कहते हैं सभी लोगों को आंखों, त्वचा, पेशाब, नाखून के रंग पर लगातार निगरानी बनाए रखना चाहिए, यदि इसमें कुछ भी असामान्य सा नजर आए तो इस बारे में किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें। इस लेख में हम नाखून के रंग में बदलाव और इससे संबंधित जोखिम के बारे में जानने की कोशिश करेंगे।
जानना जरूरी: क्या आपके भी नाखूनों का रंग हो रहा है नीला? फेफड़े-हृदय की गंभीर बीमारियों का हो सकता है संकेत
नाखूनों में नीलेपन का कारण
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यदि नीलेपन की स्थिति सिर्फ एक नाखून में है, तो यह संभवतः चोट के कारण नाखून के नीचे खून के इक्टठा होने के कारण हो सकता है। हालांकि यदि सभी नाखूनों में ऐसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो यह सायनोसिस को इंगित करता है। इसके अलावा यदि रक्त संचार प्रणाली शरीर के हर हिस्से में पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंचा पा रही है तो भी इस तरह की समस्या हो सकती है। इन स्थितियों में शीघ्रता से डॉक्टरी सलाह की आवश्यकता होती है। सायनोसिस के कई कारण हो सकते हैं, ऐसे में इसपर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज
फेफड़ों की विभिन्न समस्याओं के परिणामस्वरूप भी नाखूनों का नीला रंग हो सकता है। इसमें क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) भी शामिल है। सीओपीडी, फेफड़ों की कई प्रकार की समस्याओं का संयुक्त रूप माना जाता है। इसमें शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा प्रभावित हो सकती है, जिसका शरीर के अन्य अंगों पर भी नकारात्मक असर देखा जा सकता है। नाखूनों के नीलेपन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
रक्त वाहिकाओं का समस्या
डॉक्टर्स कहते हैं, रक्त कोशिकाओं या वाहिकाओं से संबंधित कुछ समस्याएं भी नाखून में नीलेपन का कारण बन सकती हैं। मेथेमोग्लोबिनेमिया ऐसी ही एक स्थिति है। मेथेमोग्लोबिन के स्तर में वृद्धि का कारण मेथेमोग्लोबिनेमिया की समस्या होती है। कुछ रसायनों या एंटीबायोटिक दवाओं के कारण लोगों को यह स्थिति जन्म से हो सकती है या बाद भी विकसित हो सकती है। इसमें त्वरित उपचार की आवश्यकता होती है।
हृदय से संबंधित समस्याएं
नाखूनों में नीलेपन की समस्या हृदय विकारों का भी संकेत हो सकती हैं। कॉग्नेटिव हार्ट डिजीज की स्थिति में नाखून और त्वचा के रंग में इस तरीक के बदलाव देखे जा सकते हैं। ईसेनमेंजर सिंड्रोम नामक दुर्लभ हृदय विकार के कारण भी इस तरह की समस्याओं का जोखिम हो सकता है। हृदय की समस्याएं गंभीर दिक्कतों का कारण बन सकती हैं, कुछ मामलों में इनके घातक होने का भी जोखिम होता है, इसी वजह से नाखूनों में हो रहे बदलाव पर विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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