क्या आपकी रसोई भी ऐसे प्याज हैं जिनकी ऊपरी सतह पर काले धब्बे दिखाई दे रहे हैं? जैसे ही प्याज उठाते हैं, कई बार उसके छिलके या अंदर की परतों पर काले रंग के धब्बे या पाउडर जैसा पदार्थ दिखाई देता है? क्या यह सिर्फ गंदगी है, कोई फंगस है या फिर प्याज खराब हो चुका है?
Black Mold Onion: आपकी किचन में भी हैं काले दाग वाले प्याज? इसे खाना सुरक्षित है या नहीं
आखिर प्याज पर काला दाग क्यों लगता है? किन परिस्थितियों में यह ज्यादा बनता है? क्या ऐसे प्याज को काटकर खाया जा सकता है या सीधे फेंक देना चाहिए? आइए इस बारे में जान लेते हैं।
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प्याज के छिलके पर लगा काला दाग
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्याज के छिलके पर काला दाग, मिट्टी में पाए जाने वाले एक सामान्य कवक के कारण दिखाई देता है। प्याज पर पाए जाने वाले फंगस सामान्यत: संक्रामक नहीं होते हैं, हालांकि इस्तेमाल से पहले इसे अच्छी तरह से धो लेना जरूरी है।
- अधिकांश स्वस्थ लोगों में थोड़ी मात्रा में बाहरी ब्लैक मोल्ड के संपर्क से खतरा नहीं होता है।
- हालांकि यदि फफूंदी प्याज की अंदरूनी परतों तक फैल गई हो, प्याज नरम हो गया हो या सड़न दिखाई दे रही हो, तो उसे खाना सुरक्षित नहीं माना जाता।
- फफूंदी केवल सतह पर ही नहीं रहती, बल्कि कई बार उसकी महीन जड़ें अंदर तक फैल सकती हैं, जो आंखों से दिखाई नहीं देतीं।
क्या यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है?
स्वस्थ व्यक्ति में थोड़ी मात्रा में बाहरी ब्लैक मोल्ड के संपर्क से गंभीर बीमारी होना सामान्य नहीं माना जाता।
- हालांकि कुछ लोगों में फफूंदी के बीजाणु एलर्जी, छींक, सांस की तकलीफ या आंखों में जलन जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
- जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
यदि केवल बाहरी सूखी परत पर थोड़ा काला पाउडर है और अंदर का प्याज पूरी तरह सख्त और साफ है, तो बाहरी परत हटाकर अच्छी तरह धोने के बाद उपयोग किया जा सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
आहार विशेषज्ञ कहते हैं, प्याज में काले धब्बे पैदा करने वाला फंगस आमतौर पर नुकसानदायक नहीं होता। हालांकि कुछ स्थितियों में ये ओकराटॉक्सिन ए नाम का माइकोटॉक्सिन बना सकती है। अगर इसे लंबे समय तक और ज्यादा मात्रा में खाया जाए, तो इससे किडनी और लिवर को नुकसान पहुंच सकता है।
- यह टॉक्सिन मध्यम गर्मी में भी नष्ट नहीं होता, इसलिए खाना पकाने से भी यह जरूरी नहीं कि खत्म हो जाए।
- यही वजह है कि खाने में इस्तेमाल करने से पहले इसकी ठीक से जांच करना बहुत जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।