डायबिटीज, आधुनिक समय की सबसे तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। विशेषकर भारत में पिछले एक दशक में डायबिटीज रोगियों के मामलों में तेजी से उछाल देखा गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह सच है कि आपकी उम्र या मधुमेह का पारिवारिक इतिहास, आपमें रोग के विकास की आशंका को बढ़ा सकता है, इसके साथ ही आपको लाइफस्टाइल का भी विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। हम क्या खाते हैं, किस तरह की जीवनशैली जी रहे हैं, इसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। आपको आश्चर्य हो सकता है कि दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतें भी ब्लड शुगर को बढ़ाने का कारण बन सकती हैं।
आज का हेल्थ टिप्स: दैनिक जीवन की ये सामान्य सी आदतें भी बढ़ा सकती हैं शुगर लेवल, ज्यादातर लोग करते हैं ऐसी गलतियां
सुबह का नाश्ता न करने की आदत
अगर आपको डायबिटीज की समस्या है तो आहार की गुणवत्ता और समय, दोनों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक हो जाता है। ऐसे रोगियों को ज्यादा समय तक खाली पेट न रहने की सलाह दी जाती है। ऐसे में डायबिटीज की समस्या वाले लोगों के लिए सुबह का नाश्ता बहुत अहम होता है। द जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में प्रकाशित अध्ययनों की समीक्षा के निष्कर्ष से पता चलता है कि जो लोग नाश्ता नहीं करते हैं, उनमें मधुमेह होने का अधिक खतरा होता है। रात के करीब 8-10 घंटे के बाद सुबह भी कुछ न खाने से ब्लड शुगर का लेवल बढ़ सकता है।
व्हाइट ब्रेड जैसे रिफाइंड कार्ब्स
रिफाइंड कार्ब्स तेजी से ब्लड शुगर को बढ़ा देते हैं, ऐसे में इनका सेवन आपके लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है। इसमें भी अक्सर व्हाइट ब्रेड का सेवन आपकी मुश्किलों को कई गुना तक बढ़ा सकता है। रिफाइंड कार्ब्स वाली चीजों का अधिक सेवन करना आपके ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है। यदि नाश्ते में आपकी भी अक्सर व्हाइट ब्रेड वाली चीजों को खाने की आदत है तो इसमें तुरंत बदलाव कर लें।
लगातार बैठे रहना है खतरनाक
डायबिटीज रोगियों के लिए शारीरिक सक्रियता का ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है, ऐसे में कंप्यूटर के सामने लगातार बैठे रहने की आदत आपके लिए बड़ी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। 475, 000 से अधिक लोगों पर किए गए साल 2021 के एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि गतिहीन जीवनशैली वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम 31 प्रतिशत अधिक होता है।
अकेलापन भी है घातक
पिछले कुछ समय से लोगों में कई कारणों से अकेलेपन की समस्या बढ़ती देखी गई है, इसे सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि डायबिटीज की समस्या के लिए भी हानिकारक माना जाता है। महामारी में लगभग एक वर्ष के बाद, अमेरिकी जनगणना ब्यूरो द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि 42 प्रतिशत से अधिक लोगों में चिंता या अवसाद के मामले काफी बढ़ गए हैं। शोध से पता चलता है कि लंबे समय तक अकेलापन भी टाइप-2 डायबिटीज के जोखिमों को बढ़ा सकता है। डायबेटोलोजिया जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया कि अकेले रहने या लोगों से कम मतलब रखने वाले लोगों में टाइप-2 मधमेह के विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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