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आयुष मंत्रालय संग अमर उजाला की पहल: कोरोना में कारगर है इन औषधियों का सेवन, अध्ययन में दावा

Fri, 18 Jun 2021 08:27 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 18 Jun 2021 08:27 PM IST
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ayush 64 and ashwagandha is beneficial in covid-19, Study based results
आयुर्वेद में मिलेंगेे अनुंसाधान आधारित साक्ष्य - फोटो : social media

भारत में सदियों से आयुर्वेद को विश्वसनीय चिकित्सा पद्धति के रूप में देखा जाता रहा है। पुराणों में भी आयुर्वेद के माध्यम से तमाम तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के सफल उपचार का जिक्र मिलता है। पर क्या मौजूदा समय में भी आयुर्वेद के प्रति लोगों का वैसा ही विश्वास है? विशेषज्ञों की मानें तो आजादी के बाद लोगों और आयुर्वेद के बीच की दूरी बढ़ती चली गई। इसके कई कारण हो सकते हैं, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में एक बार फिर लोगों का विश्वास इस तरफ बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। आयुर्वेद की विश्वसनीयता को और बढ़ाने के लिए इससे संबंधित अनुसंधानों पर ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि बिना प्रमाण सिद्ध किए लोगों का इस तरफ विश्वास बना पाना कठिन है।


आयुर्वेद के बारे में लोगों की जागरूकता बढ़ाने के लिए अमर-उजाला ने आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेदिक विद्यापीठ के साथ मिलकर एक पहल की है। इसमें देश के विभिन्न आयुर्वेद विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर लोगों को आयुर्वेद की विशेषता और इससे होने वाले सेहत संबंधी लाभ के बारे जागरूक करने की कोशिश की जा रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को देश के जाने-माने विशेषज्ञों के साथ एक सामूहिक चर्चा का आयोजन किया गया जिसमें 'आयुर्वेद के माध्यम से सम्पूर्ण स्वास्थ्य की संकल्पना में अनुसंधान की भूमिका' विषय पर विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए।

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अमर उजाला वेबिनार - फोटो : अमर उजाला
आयुर्वेद में अनुसंधान की भूमिका
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की निदेशक, डॉ तनुजा नेसरी कहती हैं कि दुनियाभर में आयुर्वेद के इस्तेमाल को बढ़ाने और लोगों में इसके प्रति विश्वास को स्थापित करने के लिए सही दिशा में अनुसंधान के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। आयुर्वेद के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए लोगों में इसके प्रति विश्वास को जगाना होगा। यह विश्वास तभी आएगा जब मौजूदा समय की समस्याओं के मापदंड में आयुर्वेद की प्रभाविकता को सिद्ध करने के पर्याप्त साक्ष्य लोगों के सामने पेश किए जाएंगे। कोरोना के संदर्भ में आयुर्वेद के लाभ को प्रमाण के साथ पेश करके लोगों में इसके प्रति विश्वास को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। आज के समय की मुख्य जरूरत है वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ आयुर्वेद की प्रस्तुति करना।
 
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आयुष मंत्रालय अनुसंधान पर दे रहा है जोर - फोटो : Social media
अनुसंधान की दिशा में फिलहाल क्या किया जा रहा है?
विश्वसनीयता को लिए अनुसंधान को मापदंड मानते हुए इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बारे में सीसीआरएएस के निदेशक जनरल डॉ एन श्रीकांत ने बताया कि आयुष मंत्रालय इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रहा है। मंत्रालय ने आयुष रिसर्च एंड डवेलपमेंट टास्क फोर्स का गठन किया है। इसे प्रो. भूषण पटवर्धन के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है। इस कमेटी ने कई सारी औषधियों का परीक्षण किया है। इसी क्रम में कोरोना के रोगियों के लिए आयुष-64 दवा पेश की गई। कई अन्य संस्थानों के साथ मिलकर अब तक 122 क्लीनिकल स्टडी किए जा चुके हैं। इसमें कोविड-19 जैसे रोगों की रोकथाम और मैनेजमेंट से संबंधित 60 अध्ययन शामिल हैं। 
 
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आयुष 64 दवा कोरोना में लाभदायक - फोटो : Agency

कोविड-19 और आयुष-64 दवा
आयुष-64 को लेकर किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि इस दवा का सेवन कोरोना के एसिम्टोमैटिक से लेकर माइल्ड-माडरेट रोगियों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। रोगियों को स्टैंडर्ड केयर के साथ आयुष-64 दवा देने से काफी लाभ मिलने के साक्ष्य मिले हैं। इस दवा को लेने से 6-7 दिनों में कोविड-19 के लक्षणों को कम होते देखा गया है। एक सप्ताह तक इस दवा का सेवन करने वाले लोगों का आरटी-पीसीआर भी निगेटिव देखने को मिला। इसके अलावा कोरोना के कारण होने वाली नींद और पेट से संबंधित समस्या और तनाव-घबराहट को भी आसानी से इस दवा के माध्यम से कम किया जा सकता है।

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अश्वगंधा के लाभ (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

अश्वगंधा पर शोध
वैज्ञानिकों ने अश्वगंधा को लेकर करीब 78 अध्ययन किए हैं। इसमें पाया गया कि अश्वगंधा के साथ गिलोय का सेवन करने वाले लोग कोरोना संक्रमण से 95 फीसदी तक सुरक्षित हो सकते हैं। इसके बाद भी जिनको संक्रमण हुआ उनमें गंभीर मामले नहीं देखे गए। इसके अलावा करीब 20 संस्थानों द्वारा 90 हजार लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि आयुष मंत्रालय का आयुष रक्षा किट भी कोरोना में काफी अधिक सुरक्षा दे सकता है । इसी आधार पर भारत सरकार ने प्रोफेसर बीएम कटौच के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया जिसने आयुष-64 के अलावा अश्वगंधा और गिलोय को कोविड-19 के क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल में शामिल किया। इसे कोविड-19 के उपचार के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सकों की सलाह पर लिया जा सकता है।

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