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अलर्ट: ब्लैक, व्हाइट और येलो के बाद अब इस गंभीर फंगल संक्रमण ने बढ़ाई चिंता, यहां जानिए सबकुछ

Fri, 28 May 2021 06:07 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 28 May 2021 06:07 PM IST
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साइनस पल्मोनरी एस्परजिलोसिस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : istock

पिछले डेढ़ साल से देश गंभीर रूप से कोरोना की चपेट में है। इस बीच ब्लैक, व्हाइट और येलो फंगस के मामलों ने लोगों की चिंता को और बढ़ा दिया है। कई राज्यों में महामारी का रूप ले चुके ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) के अब तक 11 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। इस बीच गुजरात के वडोदरा में डॉक्टरों ने एक अन्य गंभीर फंगल संक्रमण के बारे में लोगों को चेताया है। डॉक्टरों ने साइनस पल्मोनरी एस्परजिलोसिस संक्रमण के आठ मामलों के बारे में सूचित किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे ब्लैक फंगस की तरह ही घातक मान रहे हैं।


आइए इस लेख में जानते हैं कि एस्परजिलोसिस संक्रमण क्या है और यह किन लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है?

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कोविड संक्रमितों में एस्परजिलोसिस के मामले (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixels

काफी दुर्लभ हैं मामले
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि सामन्यतौर पर जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है उनमें पल्मोनरी एस्परजिलोसिस के मामले देखे जाते रहे हैं। हालांकि कोविड के रोगियों में देखे जा रहे साइनस पल्मोनरी एस्परजिलोसिस के मामले काफी दुर्लभ हैं। कोविड के ठीक हो चुके या कोविड का इलाज करा रहे रोगियों में इस तरह के केस सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एस्परजिलोसिस, ब्लैक फंगस जितने घातक तो नहीं है, लेकिन खतरनाक जरूर है।


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एस्परजिलस नामक फंगस का कारण होती है समस्या (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
एस्परजिलोसिस क्या है?
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार एस्परजिलोसिस, एस्परजिलस नामक फंगस के कारण होने वाली समस्या है। डॉक्टर बताते हैं कि हमारे सांस के माध्यम से एस्परजिलस के बीजाणु शरीर में चले जाते हैं लेकिन इससे कोई नुकसान नहीं होता है। हालांकि जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो या जिन्हें पहले से ही फेफड़ों की बीमारी रही हो, ऐसे लोगों में यह गंभीर समस्याओं का कारण जरूर बन सकता है। 
 
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इलाज के दौरान स्टेरॉयड का ज्यादा इस्तेमाल खतरनाक (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
क्यों बढ़ रहा है इस तरह का खतरा?
विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड के इलाज के दौरान स्टेरॉयड के ज्यादा उपयोग के कारण संक्रमितों में विभिन्न प्रकार के फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। डायबिटीज से ग्रसित लोगों के लिए ऐसी स्थिति ज्यादा खतरनाक मानी जा रही है। इसके अलावा डॉक्टर बताते हैं कि कोरोना के कुछ रोगियों के रक्त में लिम्फोसाइटों की कमी भी देखी जा रही है, इसे भी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर फंगल संक्रमण के लिए अनुकूल माहौल देने का कारण माना जा रहा है। 
 
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कई रोगों में दिख सकता है इस फंगस का असर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
क्या एस्परजिलोसिस का भी कोई कलर कोड है?
पिछले दिनों  ब्लैक, व्हाइट और येलो फंगस के मामले देखने को मिले। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि इस तरह से एस्परजिलोसिस की कलर को़डिंग नहीं की जा सकती है। कुछ मामलों में त्वचा पर इस संक्रमण का भूरा, नीला-हरा और ग्रे रंग का प्रभाव देखने को मिल सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक इसकी जल्द पहचान जरूरी है। सामान्य तौर पर एम्फोटेरिसिन-बी नामक दवा से इसे ठीक किया जा सकता है हालांकि अलग-अलग रोगियों की स्थिति के आधार पर कुछ अन्य दवाओं का आवश्यकता हो सकती है।

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नोट: यह लेख मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।


 
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