दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के मामलों को डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान लोगों को संक्रमण की गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ा। एक समय देश में अपर्याप्त मालूम हो रही चिकित्सा सुविधाओं के बीच सदियों पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा ने लोगों का ध्यान न सिर्फ अपनी ओर आकर्षित किया, साथ ही इससे लोगों को लाभ भी मिला। विशेषकर कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लोगों ने कोविड-19 संक्रमण से छुटकारा पाने या सुरक्षित रहने के लिए तमाम तरह की औषधियों का उपयोग किया, अश्वगंधा उन्हीं औषधियों में से एक है।
आयुर्वेद: कोविड रिकवरी में कितनी कारगर है अश्वगंधा? यूके के तीन शहरों में अध्ययन
2000 लोगों पर किया जाएगा अध्ययन
भारत में अश्वगंधा के औषधीय गुणों पर कई शोध हुए हैं, लेकिन यह पहली बार है जब कोविड-19 में इस औषधि के फायदों के बारे में जानने के लिए आयुष मंत्रालय ने किसी विदेशी संस्थान के साथ करार किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक लीसेस्टर, बर्मिंघम और लंदन में 2000 लोगों पर यह अध्ययन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य यह जानना है कि क्या यह जड़ी-बूटी (अश्वगंधा) कोविड-19 से तेजी से रिकवरी करने में मदद कर सकती है?
अश्वगंधा के फायदों को जानने के लिए किया जाएगा अध्ययन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैसे तो भारत में अश्वगंधा जूस, टैबलेट और पाउडर कई फॉर्मेट में भी उपलब्ध है, हालांकि शोध में भाग लेने वालों को अश्वगंधा की गोलियां दी जाएंगी। उन्हें दिन में दो बार 500 मिलीग्राम की गोलियां लेनी होंगी। सभी प्रतिभागियों में एक महीने तक जीवन की गुणवत्ता, मानसिक स्वास्थ्य, प्रतिकूल प्रभाव (यदि कोई हो) सहित विभिन्न पहलुओं पर निगरानी की जाएगी।
महत्वपूर्ण होगा यह अध्ययन
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की निदेशक डॉ तनुजा नेसारी बताती हैं, तीन महीने के लिए, 1,000 प्रतिभागियों के एक समूह को अश्वगंधा की गोलियां दी जाएंगी, जबकि 1,000 प्रतिभागियों के दूसरे समूह को प्लेसबो दिया जाएगा। प्लेसबो की गोलियां और स्वाद भी बिल्कुल अश्वगंधा की तरह ही होगा। हालांकि रोगी और डॉक्टर, इस बात से बात से अनजान होंगे कि किस समूह को प्लेसबो दी जा रही है और किस समूह को अश्वगंधा की गोलियां? इस अध्ययन के आधार पर कोविड-19 की रिकवरी में अश्वगंधा के फायदों के बारे में जानने की कोशिश की जाएगी।
आयुष-64 दवा के देखे गए हैं तमाम फायदे
आयुर्वेद में शोध पर फिलहाल विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी से संबंधित हाल ही में आयुष राज्यमंत्री महेंद्रभाई मुंजापारा ने राज्यसभा को बताया कि मंत्रालय कोविड-19 के प्रकोप को रोकने के लिए आयुष दवाओं की प्रभावशीलता पर व्यापक शोध कर रहा है। आयुष मंत्रालय द्वारा पेश की गई कोरोना की दवा आयुष-64 को पहले ही कोरोना के एसिम्टोमैटिक, हल्के और मध्यम लक्षण वाले संक्रमण में काफी उपयोगी पाया गया है। मंत्रालय लगातार नए शोध के माध्यम से आयुर्वेद की विश्वसनीयता को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
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नोट: यह लेख मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार तैयार किया गया है।
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