Medically Reviewed by Ms. Priya Pandey
शरीर में खून की कमी होना इन दिनों आम समस्या हो गई है। खून की कमी को एनीमिया कहा जाता है। जब रक्त हीमोग्लोबिन की मात्रा से कम हो जाता है, तो एनीमिया की स्थिति बन जाती है। भारत की महिलाओं में एनीमिया की शिकायत आम समस्या है। सामान्य तौर पर महिलाओं के रक्त में 12 से 16 ग्राम प्रति डीएल हीमोग्लोबिन की मात्रा होती है। वहीं पुरुषों में 14 से 18 ग्राम प्रति डीएल हीमोग्लोबिन पाया जाता है। शरीर में जब इससे कम मात्रा हो जाती है, तो एनीमिया का संकेत माना जाता है। जो लोग एनीमिया से पीड़ित होते हैं उन्हें भूख नहीं लगती, कमजोरी होने लगती है और दिल की धड़कनों के कम होने की समस्या होने लगती है। लोगों में एनीमिया की शिकायत अधिकतर पीलिया, बवासीर, किसी दुर्घटना में अधिक खून बह जाने के कारण और महिलाओं को प्रसव के दौरान हो सकती है। अगर आप भी एनीमिया की शिकायत से पीड़ित हैं तो कुछ घरेलू उपायों से खून की कमी से बच सकते हैं। चलिए जानते हैं कि क्या चीजें खाने से खून की कमी होती है दूर और एनीमिया से मिल सकता है छुटकारा।
Health Tips: एनीमिया की समस्या को दूर करने के लिए खाएं ये चीजें, एक महीने में ही दिखने लगेगा असर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेब और चुकंदर के जूस का सेवन
स्वास्थ्य विशेषज्ञ के मुताबिक, सेब और चुकंदर का सेवन शरीर में रक्त की कमी को पूरा कर सकता है। एक कप सेब और आधा कप चुकंदर का रस रोजाना पीने से खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ने लगती है। चाहें तो केवल चुकंदर का जूस का ही सेवन कर सकते हैं, ये खून की कमी की समस्या को दूर कर सकता है।
दूध और तिल का सेवन
एनीमिया की शिकायत है तो काले तिल को दूध के साथ पीएं। इसके लिए काले तिल को दो घंटे के लिए भिगो दें। उसके बाद तिल का पेस्ट बना लें। एक चम्मच तिल के पेस्ट में शहद और दूध मिलाकर सेवन करें। इससे खून की समस्या दूर होती है।
पालक का सेवन
हरी पत्तेदार सब्जियां पौष्टिकता से भरपूर होती हैं। पालक में आयरन का बेहतर स्रोत माना जाता है। विशेषज्ञ पालक खाने की सलाह देते हैं। खून की कमी होने पर पालक के सूप का सेवन लाभकारी होता है।
किशमिश
खून की कमी को दूर करने के लिए किशमिश और सूखे आलूबुखारे को भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। यह आयरन के बेहतरीन स्त्रोत होता है।
---------------
नोट: यह लेख अनुभवी डायटिशियन (आहार विशेषज्ञ) प्रिया पांडेय के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने कानपुर के सी.एस.जे.एम. विश्वविद्यालय से मानव पोषण में बी.एस.सी. किया है। उन्होंने कानपुर के आभा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आहार विशेषज्ञ के रूप में काम किया है। उन्होंने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पोषण व्याख्यान के विषय के प्रतिनिधि के रूप में भी भाग लिया है। उनका इस क्षेत्र में 8 वर्ष का लंबा अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।