वैश्विक स्तर पर जिन न्यूरोलॉजिकल विकारों के मामले सबसे ज्यादा बढ़ते हुए देखे जाते रहे हैं, अल्जाइमर रोग उनमें से एक है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि अमेरिका में 60 लाख से अधिक लोगों को अल्जाइमर रोग है। भारत में भी इस रोग के मामले तेजी से बढ़े हैं। 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में अल्जाइमर की समस्या को काफी अधिक देखा जाता रहा है। अल्जाइमर रोग के बढ़ते खतरे को रोकने और इससे बचाव के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 21 सितंबर को वर्ल्ड अल्जाइमर डे मनाया जाता है।
Alzheimer’s Day 2022: आपकी ये आदतें बढ़ा देती हैं अल्जाइमर रोग का खतरा, जानिए इसके लक्षण से लेकर बचाव तक सबकुछ
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अल्जाइमर रोग के बारे में जानिए
अध्ययनों से पता चलता है कि किसी को भी 60 की आयु के बाद अल्जाइमर रोग हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसके लिए अधिक जोखिम होता है। 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग या फिर जिन लोगों के परिवार में पहले भी किसी को यह समस्या रह चुकी है उनमें अल्जाइमर रोग विकसित होने का जोखिम अधिक होता है।
अल्जाइमर का अभी तक कोई विशिष्ट इलाज नहीं है, हालांकि सही निदान के बाद सहायक उपचार के माध्यम से रोग की प्रगति को धीमा करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिल सकती है। यही कारण है कि सभी लोगों के न्यूरोलॉजिकल विकारों के बारे में जानने और उनसे बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी जाती है।
अल्जाइमर रोग में किस तरह कि दिक्कतें होती हैं?
डॉक्टर्स कहते हैं, अल्जाइमर रोग की स्थिति में भूलने की समस्या सबसे सामान्य है। लेकिन समय के साथ यह व्यवहार में परिवर्तन का भी कारण बन सकती है। रोगियों में सामान्यतौर पर ये दिक्कतें देखी जाती रही हैं।
- चीजों को याद रखने में कठिनाईं, लोगों के नाम भूल जाना।
- पहले जो कम आसानी से कर लेते थे उसे अब करने में काफी दिक्कत होना।
- समस्याओं का समाधान कर पाने में दिक्कत होना।
- बोलने या लिखने में परेशानी।
- निर्णय लेने में दिक्कत होना।
- मनोदशा और व्यक्तित्व में परिवर्तन।
इन संकेतों का हमेशा यह मतलब नहीं होता है कि व्यक्ति को अल्जाइमर है। इनके कारणों को निर्धारित करने के लिए डॉक्टर को दिखना जरूरी हो जाता है।
क्यों होता है अल्जाइमर रोग?
अल्जाइमर रोग क्यों होता है, अभी तक इसके सटीक कारणों को पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है। लेकिन बुनियादी स्तर पर माना जाता है कि मस्तिष्क में प्रोटीन सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाते हैं जिसके कारण मस्तिष्क कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) का काम भी बाधित हो जाता है, इसके कारण इस तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि अधिकांश लोगों को अल्जाइमर रोग, आनुवंशिक, जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों के संयोजन के कारण होता है। जिन लोगों में इसका जोखिम कारक होता है उन्हें डॉक्टर की सलाह लेते रहनी चाहिए।
किन लोगों में होता है अल्जाइमर रोग का खतरा?
डॉक्टर्स बताते हैं, बढ़ती उम्र अल्जाइमर रोग के लिए सबसे बड़ा ज्ञात जोखिम कारक है, हालांकि सभी लोगों को यह समस्या हो, ऐसा जरूरी नहीं है। जिन लोगों के माता-पिता में से किसी को अल्जाइमर रोग रह चुका है उनमें इसके विकसित होने का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा अगर आपको डाउन सिंड्रोम नामक समस्या रही है तो यह भी अल्जाइमर के जोखिम को बढ़ा सकती है। सिर में चोट, वायु प्रदूषण और अल्कोहल के सेवन के कारण भी इस रोग का खतरा बढ़ता जा रहा है।