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सावधान: कोरोना काल में संक्रमण के अलावा इस आदत ने बढ़ा दिया है मौत का जोखिम, अध्ययन में बड़ा खुलासा

Sat, 08 Jan 2022 02:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 08 Jan 2022 02:00 PM IST
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Alcohol consumption during COVID-19 pandemic will result additional deaths, says study
शराब के कारण बढ़ता मौत का खतरा - फोटो : Pixabay

दुनियाभर में पिछले दो साल से अधिक समय से कोरोना का संक्रमण लगातार जारी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक 30 करोड़ से ज्यादा लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं, जबकि 54 लाख से अधिक लोगों की इससे मौत गई है। कोरोना के डेल्टा जैसे वैरिएंट्स को काफी घातक माना जाता है, यह संक्रमितों में गंभीर समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इस बीच एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोरोना काल में संक्रमण के अलावा कुछ अन्य कारणों से मौत के मामलों में इजाफा देखने को मिला है। इस दौरान शराब के सेवन की बढ़ी आदतों को उनमें से एक माना जा रहा है।



अध्ययन में पाया गया कि कोविड-19 महामारी के दौरान शराब की खपत में 21 फीसदी की वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप शराब से संबंधित लिवर की बीमारी के कारण आठ हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा लिवर फेलियर के 18,700 और लिवर कैंसर के एक हजार से अधिक मामले सामने आए हैं। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि लोगों की इस एक आदत ने स्वास्थ्य समस्या और मौत के जोखिम को कई गुना तक बढ़ा दिया है। इसको लेकर विशेष सावधान रहने की आवश्यकता है।

Alcohol consumption during COVID-19 pandemic will result additional deaths, says study
कोरोना काल में बढ़ा शराब का सेवन - फोटो : Pixabay

कोरोना काल में बढ़ी शराब की खपत
हार्वर्ड से संबंधित मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि जिस तरह से महामारी के दौरान शराब के सेवन में वृद्धि देखी गई है, उससे आशंका है कि अगले साल तक इस वजह से 100 से अधिक लोगों की मौत और 2,800 से अधिक लोगों में लिवर फेलियर के मामले सामने आ सकते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि एक साल से अधिक समय तक शराब के सेवन के कारण मृत्यु दर में 19 से 35 फीसदी तक की वृद्धि की आशंका बढ़ जाती है।

Alcohol consumption during COVID-19 pandemic will result additional deaths, says study
सेहत के लिए नुकसानदायक है शराब - फोटो : Pixabay

क्या कहता है विश्व स्वास्थ्य संगठन?
दुनियाभर में हुए तमाम अध्ययनों में वैज्ञानिक शराब के सेवन को लिवर की बीमारियों और इसके कारण होने वाली मौत का प्रमुख कारण मान रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि शराब के सेवन से विश्व स्तर पर हर साल 30 लाख लोगों की मौत होती है। इसके अलावा लाखों लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कई गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। कुल मिलाकर वैश्विक स्तर पर होने वाली गंभीर बीमारियों में करीब 5 फीसदी के लिए शराब के सेवन को प्रमुख कारण माना जा सकता है। 15 से 49 की आयु के लोगों में समय से पहले मृत्यु और विकलांगता के लिए भी शराब प्रमुख जोखिम कारक है।

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Alcohol consumption during COVID-19 pandemic will result additional deaths, says study
लिवर की बीमारियों का बढ़ गया खतरा - फोटो : iStock

शराब के कारण बढ़ रही है लिवर की बीमारी
शराब और स्वास्थ्य पर साल 2018 की डब्ल्यूएचओ वैश्विक स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में भारत में प्रति व्यक्ति शराब की खपत 5.7 लीटर थी। रिपोर्ट में कहा गया है यह तेजी से लोगों में लिवर संबंधी बीमारियों के जोखिम को बढ़ाती जा रही है। साल 2018 में भारत में लीवर की बीमारी से होने वाली मौतों की संख्या 264,193 तक पहुंच गई थी। कोरोना काल में बढ़े शराब के सेवन के कारण यह आंकड़ा और अधिक होने की आशंका है।

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शराब से दूरी बनाना जरूरी - फोटो : Pixabay

क्या है अध्ययन का निष्कर्ष
एमजीएच इंस्टीट्यूट फॉर टेक्नोलॉजी असेसमेंट में डेटा विश्लेषक और अध्ययन के प्रमुख लेखक जोवन जूलियन कहते हैं, कोरोना के कारण कई तरह के दीर्घकालिक जोखिमों का खतरा भी बढ़ गया है। इसके साथ इस दौरान बढ़े शराब के सेवन ने स्वास्थ्य के लिए एक और बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। शराब की लत हमेशा एक गंभीर विषय रही है, लोगों को इसके सेवन से दूर रखने में मदद करने के लिए कई पहल भी की गई हैं। आने वाले वर्षों में इस एक आदत के कारण लिवर संबंधी गंभीर मामले और इससे संबंधित मौत में इजाफा हो सकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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