वैश्विक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के मामले काफी तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। विशेषकर कोरोना संक्रमण के बाद से इसका जोखिम और भी बढ़ा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी उम्र के लोगों में मानसिक स्वास्थ्य विकार के मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं। भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बना टैबू अब भी लोगों को स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त करने में बाधा बन रहा है, ऐसे में आशंका है कि वास्तविक आंकड़े काफी अधिक हो सकते हैं।
Mental Health: किस उम्र वाले व्यक्ति में कैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं? सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
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बच्चों-युवाओं में बढ़ती समस्या
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भारत में बच्चे और युवा भी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव कर रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक कलंक और नकारात्मक दृष्टिकोण, युवाओं को मदद प्राप्त करने में बाधा बन रही है। इसके अलावा देश में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की सहज उपलब्धता की कमी भी इस संबंध में जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है।
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएमएचएस) 2015-16 के अनुसार, 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में ये स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहा है।
चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े
मानसिक स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित ऑनलाइन मदद के लिए स्थापित टेली मानस के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। टेली मानस सेल इंदौर द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक मदद के लिए कॉल करने वाले 80 फीसदी से अधिक लोग 18-45 की आयु वाले हैं, जिसका मतलब है कि इस आयुवर्ग में स्वास्थ्य समस्याएं सबसे अधिक रिपोर्ट की जा रही हैं।
टेली मानस, टोलफ्री हेल्पलाइन है, जिसपर देश के किसी भी कोने से कॉल करके विशेषज्ञों से मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित सहायता प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए 14416 या फिर 18008914416 पर भी कॉल कर सकते हैं।
युवा आबादी में समस्याएं
टेली मानस इंदौर द्वारा साझा आंकड़ों के मुताबिक युवा आबादी में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं अधिक हैं। 12 साल तक के बच्चों में बौद्धिक विकलांगता, फोकस न बनने की समस्या अधिक देखी जा रही है। 13-18 साल वालों में परीक्षा से संबंधित तनाव, गुस्से की समस्या, व्याहारिक विकार और तनाव के मामले देखे जा रहे हैं। वहीं 18-45 की आयु वाले लोगों में डिप्रेशन, एंग्जाइटी और पारिवारिक समस्याओं के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर असर देखा जा रहा है।
बुजुर्गों में होने वाली समस्याएं
आंकड़ों के मुताबिक 46-60 की आयु वाले लोगों में मानसिक स्वास्थ्य विकार के मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं पर इसके आंकड़े अधिक नहीं हैं। इस आयु वर्ग वाले ज्यादातर लोग डिप्रेशन और पारिवारिक समस्याओं के साथ डिमेंशिया के शिकार देखे जा रहे हैं। वहीं 60 साल से अधिक लोगों में डिमेंशिया, याददाश्त से संबंधित दिक्कत और पारिवारिक समस्याएं अधिक देखी जा रही है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।