कोरोना वायरस, जिसकी चर्चा इन दिनों तर तरफ है। ये वायरस लोगों को अपना शिकार बना रहा है, और कई लोगों की तो जान तक ले रहा है। ऐसे में हर कोई परेशान है, लोग डरे हुए हैं और उनका डरना स्वाभाविक भी है। वहीं, अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की कमी से भी लोग काफी परेशान है। हर कोई बस यही दुआ कर रहा है कि ये कठिन समय जल्द से जल्द बीत जाए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये कोरोना वायरस आज से धरती पर नहीं है। ये वायरस लगभग 25 हजार साल पहले से इंसानों को परेशान कर रहा है, लेकिन ऐसा हम नहीं बल्कि ऐसा एक अध्ययन कह रहा है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में।
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दुनिया में कोरोना
- फोटो : पिक्साबे
दरअसल, इस अध्ययन को यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के असिस्टेंट प्रोफेसर डेविड एनार्ड ने किया है और उनका ये अध्ययन bioRxiv में प्रकाशित हुआ। हालांकि, इसका अब तक पीयर रिव्यू नहीं हुआ है और साइंस जर्नल में इसके प्रकाशन के लिए रिव्यू किया जा रहा है। प्रोफेसर डेविड ने कहा कि, ये हर समय एक ऐसा वायरस रहा है, जिसने लोगों का बीमार किया और मारा भी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
डेविड ने बताया कि, इंसानों की तरह ही वायरस भी पीढ़ी दर पीढ़ी अपने नए जीनोम के जरिए आगे बढ़ते रहे हैं। महज वायरस ही नहीं बल्कि ये प्रक्रिया हर प्रकार के पैथोजेन यानी रोगजनकों के साथ होती है। इसका मतलब है कि हर प्रकार के रोगाणुं अपनी पीढ़ियों में लगातार बदलाव करते हैं, ताकि वो भी प्रकृति में सर्वाइव कर सकें।
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कोरोना की जांच के लिए सैंपल लेता स्वास्थ्य कर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
प्रोफेसर डेविड ने बताया कि उनकी टीम ने प्राचीन कोरोना वायरस को खोजने के लिए विश्वभर के 26 अलग-अलग इंसानी आबादी के 2504 लोगों के जीनोम की जांच की। इस जांच में जो सामने आया वो बेहद चौंकाने वाला था। इसमें पता चला कि कोरोना वायरस जैसे पैथोजेन इंसानों के डीएनए में प्राकृतिक चयन करके पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ते आए हैं।
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कोरोना वायरस
- फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों ने जब जांच की तो पता चला कि कोरोना वायरस इंसान के शरीर में 420 प्रकार के प्रोटीन से संपर्क करता है, जिसमें से 332 प्रोटीन सीधे कोरोना खुद इंटरैक्ट करते हैं। वहीं, उनका मानना है कि इस अध्ययन से इस बात में मदद मिलेगी कि भविश्य में किस तरह के वायरस आ सकते हैं और ये किस तरह के लोगों को संक्रमित करेगा।