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5 तरह का होता है मलेरिया बुखार, जानें क्या हैं लक्षण और बचाव का तरीका

Fri, 28 Sep 2018 12:27 PM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 28 Sep 2018 12:27 PM IST
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Know 5 types of malaria fever and their symptoms and treatment
मलेरिया बुखार एक संक्रामक रोग है। जो व्यक्ति को फीमेल एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है। इस मच्छर में एक विशेष प्रकार का जीवाणु पाया जाता है जिसे डॉक्टरी भाषा में प्लाज्मोडियम कहा जाता है।बता दें, मलेरिया फैलाने वाली इस मादा मच्छर में पाई जाने वाले जीवाणु की 5 जातियां होती हैं।मच्छर के काटने से प्लाज्मोडियम नामक जीवाणु शरीर में चला जाता है और वह रोगी के शरीर में कई गुना वृद्धि (मल्टीप्लाई) करता है। यह जीवाणु लिवर और रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करकेरोगी को बीमार करता है। समय पर इलाज न होने की स्थिति में यह मर्ज जानलेवा हो सकता है। बुखार, पसीना आना, शरीर में दर्द और उल्टी आना इस रोग के लक्षण हैं। अपने आस-पास गंदगी और पानी इकठ्ठा न होने देने पर इस मच्छर को पनपने से रोका जा सकता है।    
Know 5 types of malaria fever and their symptoms and treatment
मलेरिया के प्रकार-
-प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम (P. Falciparum)
इससे पीड़ित व्यक्ति को मालूम ही नहीं चलता है की वो क्या बोल रहा है। इसमें रोगी को बहुत तेज ठंड लगती है। इसके साथ-साथ उसके सिर में दर्द के साथ उसे उल्टियां भी होती रहती हैं। खास बात यह है कि इस बुखार में व्यक्ति की जान भी जा सकती है। 
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सोडियम विवैक्स (P. Vivax):
अधिकतर लोग इस तरह के मलेरिया बुखार से पीड़ित होते हैं। विवैक्स परजीवी ज्यादातर दिन के समय आता है। यह बिनाइन टर्शियन मलेरिया उत्पन्न करता है जो प्रत्येक तीसरे दिन अर्थात 48 घंटों के बाद अपना असर दिखाता है। इस बीमारी में कमर, सिर, हाथ, पैरों में दर्द, भूख ना लगना, कंपकपी के साथ तेज बुखार का आना आदि लक्षण देखे जाते हैं। 
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मच्छर
प्लाज्मोडियम ओवेल मलेरिया (P. Ovale):
यह भी बिनाइन टर्शियन मलेरिया उत्पन्न करता है।
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प्लास्मोडियम मलेरिये (P. malariae):
प्लास्मोडियम मलेरिया एक प्रकार का प्रोटोजोआ है, जो बेनाइन मलेरिया के लिये जिम्मेदार होता है। यह पूरे संसार में पाया जाता है। यह मलेरिया उतना खतरनाक नहीं होता है जितना प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम (Plasmodium falciparum) तथा प्लास्मोडियम विवैक्स होते हैं। यह क्वार्टन मलेरिया उत्पन्न करता है, जिसमें मरीज को हर चौथे दिन बुखार आता रहता है।जब किसी व्यक्ति को ये रोग होता है तो उसके यूरिन से प्रोटीन निकलने लगते हैं। जिसकी वजह से शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाती है और शरीर में सूजन आने लगती है।
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