बारिश का मौसम प्रकृति की खूबसूरती साथ लेकर आता है। इस दौरान कभी रिमझिम तो कभी तेज बारिश जारी रहती है। मौसम में इस बदलाव के चलते थोड़ा असर रोजमर्रा की जिंदगी पर भी आता है। मौसम कोई भी हो लेकिन रोजमर्रा की गतिविधियों को इसकी वजह से बंद तो नहीं किया जा सकता। स्कूल-कॉलेज और दफ्तर से लेकर दुकानें और काम इस बीच भी जारी रहते हैं। ऐसे में जरूरत होती है एक अच्छे रेनवेयर या रेनकोट की जो बारिश से ज्यादा से ज्यादा बचाव भी करे और सुरक्षित भी रखे। एक बार खरीदा गया अच्छी क्वालिटी का रेनकोट सही तरीके से संभालने पर कई साल तक चल सकता है।
Raincoat: बारिश से बचना है तो रेनकोट खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
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ध्यान रखना है जरूरी
एक अच्छा रेनकोट या रेनवेयर केवल मटेरियल या ब्रांड से ही नहीं पहचाना जाता। इसकी फिटिंग, अंदर की सिलाई, हुड का पैटर्न सभी कुछ महत्वपूर्ण होता है। खरीदते समय इन सारी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। कई बार केवल मटेरियल देखकर रेनवेयर खरीद लेने से बाद में शरीर को पर्याप्त हवा न मिलने, पानी के न रुक पाने और नमी की वजह से त्वचा संबंधी दिक्कत आने की आशंका हो सकती है। यदि लम्बे समय तक गलत मटेरियल का रेनवेयर पहनते रहें तो त्वचा के अलावा बाकी शरीर को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसमें त्वचा पर रैशेज, दाने, खुजली और जलन के अलावा, पसीने के न सूख पाने पर होने वाली दिक्कतें, शरीर का तापमान संतुलित न रहने पर होने वाली समस्याएं आदि शामिल हैं। खासतौर पर यदि रोज टू व्हीलर पर रेनवेयर पहनकर आना-जाना हो तो।
इस तरह के होते हैं रेनकोट
यूं रेनकोट्स कई तरह के आते हैं लेकिन जरूरत के हिसाब से सही रेनकोट का चुनाव आपकी कई सारी परेशानियों को खत्म कर सकता है। यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि हर रेनकोट वॉटरप्रूफ नहीं होता। तो अगर आप ऐसे किसी इलाके में रहते हैं जहाँ बारिश तेज होती है या आपको ज्यादा समय बारिश में रहना पड़ता है तो आपके रेनकोट को उसी हिसाब से होना चाहिए। रेनकोट जम्पसूट स्टाइल में चाहिए या फुल लेंथ सिंगल पीस यह भी आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए रेनकोट्स के कुछ प्रकार और उनसे जुड़े फायदे इस प्रकार हैं-
फुल लेंथ रेनकोट: अधिकांशतः इस रेनकोट का प्रयोग महिलाएं और बच्चे करते हैं। यह एक पीस में पूरे शरीर को कवर कर सकता है और स्कूली बच्चों के लिए इसमें बैग की जगह भी हो जाती है। यह रेनकोट सामान्य रेनकोट से अधिक लम्बा होता है। एक सामान्य रेनकोट अधिक से अधिक घुटनों तक का हिस्सा कवर करता है, जबकि फुल लेंथ रेनकोट एंकल यानी टखनों तक आ सकता है। इसका एक और फायदा यह भी है कि इसके साथ आप कोई भी ड्रेस पहन सकते हैं, साड़ी से लेकर पेंट-शर्ट तक। साथ ही इसे उतारने और पहनने में ज्यादा झंझट भी नहीं होता। यही कारण है कि कुछ पुरुषों को भी यह ज्यादा सुविधाजनक लगता है।
एक मौसम दो असर वाला रेनकोट: इस रेनकोट का उपयोग बारिश के साथ साथ सर्दी से बचाव के लिए भी किया जा सकता है। इस तरह के रेनकोट में ऊपर के कोट के साथ ही अंदर एक जैकेट अटैच रहती है। यह जैकेट सेम मटेरियल की भी हो सकती है और अलग मटेरियल की भी। यह बारिश के दौरान लगने वाली ठंड या ठंड के मौसम में होने वाली बारिश, दोनों ही स्थितियों में शरीर के लिए एक्स्ट्रा कवर का काम करती है और शरीर को गर्म रखने में मदद करती है।
2 पीस रेनकोट: इसे आप लोअर-शर्ट रेनकोट या शर्ट-पैंट रेनकोट के तौर पर भी पहचानते हैं। ज्यादातर इसका उपयोग पुरुष करते हैं, वह भी रोजाना दुपहिया से आने-जाने वाले या फील्ड में काम करने वाले। स्कूल-कॉलेज के बच्चे भी इसका उपयोग कर सकते हैं लेकिन इसके साथ सबसे बड़ी समस्या होती है पहनावे की। महिलाओं के पहनावे के साथ इसे पहनना सहज नहीं होता। लेकिन जींस, लोअर्स, कैप्री आदि जैसे परिधानों के साथ महिलाएं भी इसका उपयोग आसानी से कर सकती हैं। इसका फायदा यह है कि यह पूरे शरीर सहित पैरों तक का बचाव कर सकता है। जबकि सिंगल पीस रेनकोट में यह सम्भव नहीं होता।
इसके अलावा कुछ लोग हल्की बारिश के लिए विंडचीटर का उपयोग भी करते हैं जो ठंडी हवा से भी थोड़ा बचाव कर सकता है। वहीं ट्रैकिंग, हाइकिंग या आउटडोर एडवेंचर के लिए लोग हाइकिंग जैकेट्स, केचुआ कोट्स या जैकेट्स भी खरीदना पसंद करते हैं।
कैसा मटेरियल चुनें?
रेनकोट के मटेरियल का चुनाव कई बातों पर निर्भर करता है। इसमें सबसे प्रमुख है कि आप वॉटरप्रूफ रेनकोट चाहते हैं, वॉटर रजिस्टेंट या वॉटर रेपलेंट। तीनों में ही फर्क है। इसके बाद यह मायने रखता है कि मटेरियल में त्वचा तक हवा पहुंचने और पसीने की स्थिति में शरीर के तापमान को संतुलित बनाये रखने का गुण है या नहीं। गुणवत्ता भी एक बड़ा मामला है। यदि खरीदने के 10 दिन के भीतर ही रेनकोट क्षतिग्रस्त हो जाए तो इसका मटेरियल संदेह में आ जाता है। बाजार में कई तरह के मटेरियल उपलब्ध होते हैं जिनमें से आपको अपनी जरूरत के हिसाब से चुनाव करना होता है।
उदाहरण के लिए सिल्क और मिक्स से बने रेनकोट हल्के होते हैं लेकिन ये वॉटर रेपलेंट होते हैं और तेज बारिश में इन्हें पहनने का कोई मतलब नहीं रहता। जबकि सबसे अच्छे मटेरियल में वॉटरप्रूफ मटेरियल को माना जाता है। सर्द जगहों पर रहने वालों के लिए ऊनी मटेरियल को भी वॉटर रजिस्टेंट बनाकर रेनकोट बनाया जाता है। ये रेनकोट नरम तो होते हैं लेकिन वजन में अधिक होते हैं। इसलिए इन्हें साथ लेकर घूमना मुश्किल होता है। वहीं लिनन जैसे इको-फ्रेंडली मटेरियल को वॉटर रेपलेंट के साथ मिलाकर भी रेनकोट बनाया जाता है। लेकिन यह भारी बारिश में बेअसर हो सकता है। इन सबके अलावा आर्टिफिशियल फाइबर से भी रेनकोट बनाये जाते हैं जो कि तेज बारिश में भी पर्याप्त सुरक्षा दे सकते हैं और लम्बे समय तक चलने वाले होते हैं।