कोरोना महामारी की वजह से पूरा विश्व हेल्थ सेक्टर पर विशेष ध्यान दे रहा है। साथ ही भविष्य में आने वाली चुनौतियों से लड़ने के लिए खुदको तैयार भी कर रहा है। इसी कढ़ी में अब कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) समूचे विश्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में नई नौकरियों पैदा करने हेतु विभिन्न देशों के साथ मिलकर कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए मापदंड तैयार कर रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सृजित होंगी 3 लाख नई नौकरियां, आठ देशों के साथ किया समझौता
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हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कोराेना महामारी की वजह से स्वास्थ्य के क्षेत्र में अवसरों का दायरा बढ़ गया है। कई ऐसे क्षेत्र भी हैं जिन पर काम करने की आवश्यकता है। उदाहरण के तौर पर, विभिन्न देशों के लिए ऑपरेशन थियेटर टेक्नीशियन के भिन्न कौशल की जरूरत हो सकती है। इसलिए मंत्रालय, गंतव्य देशों में नौकरी करने के लिए आवश्यक कौशल का विवरण तैयार करेगी।
उदाहरण के लिए, गल्फ देशों में निर्माण और संबंधित गतिविधियों जैसे क्षेत्रों में अवसर हैं, जबकि यूरोपीय देशों में हेल्थ केयर वर्कर्स और कार्यबल की ज्यादा मांग है। यूएसए, कनाडा, यूके, ईयू और ऑस्ट्रेलिया में हेल्थकेयर, प्रबंधन, वित्तीय सेवाओं और प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में तकनीकी कौशल वाले लोगों की जरूरत है। वहीं निर्माण, रिटेल और ड्राइवरों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए प्रमुख गंतव्य मध्य पूर्व और गल्फ देश हैं।
भविष्य में विभिन्न देशों के साथ समझौता करने के लिए, भारतीय दूतावास को प्रमुख स्वास्थ्य क्षेत्र के नियोक्ताओं के साथ एमएसडीई के वेबिनार आयोजित करने के लिए कहा गया है। वहीं प्लेसमेंट एजेंसियों को देश और क्षेत्रवार, स्वास्थ्य कर्मियों की मांग की सूची तैयार करने और स्वास्थ्य क्षेत्र व पेशेवरों के नियोक्ता या नियोक्ता संघ के बीच आभासी बैठकों का आयोजन करने को कहा गया है।
विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली में प्रतिष्ठित फेलो और श्रम सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञ समिति के सह-अध्यक्ष, प्रोफेसर अमिताभ कुंडू बताते हैं कि हेल्थ सेक्टर पर अधिक समय तक ध्यान केंद्रित नहीं रह सकता है। 6 से 8 महीने के बाद, पूरा परिदृश्य महामारी के पहले जैसा हो जाएगा। इसलिए असंगठित क्षेत्र पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय कौशल विकास निगम ने व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग के लिए जापान, यूएई, स्वीडन और रूस सहित आठ देशों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।