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यूपी में करीब 35 हजार पदों पर पुलिस-पीएसी की भर्तियों को हरी झंडी, कोई लिखित परीक्षा नहीं

Sat, 31 Mar 2018 08:00 AM IST
जॉब डेस्क, अमर उजाला
जॉब डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 31 Mar 2018 08:00 AM IST
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Recruitment of police and PAC constable posts in Uttar pradesh
बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। उत्तर प्रदेश में पुलिस और पीएसी सिपाहियों की भर्ती बंपर भर्ती होगी। भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिसके बाद बेरोजगार आवेदकों में खुशी की लहर है। 
Recruitment of police and PAC constable posts in Uttar pradesh
यूपी में 34716 पुलिस और पीएसी सिपाहियों की भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं एक  साथ सुनवाई के बाद खारिज कर दी हैं। याचिकाओं में दिसंबर 2015 में जारी विज्ञापन के तहत बिना लिखित परीक्षा के भर्ती करने के नियम को चुनौती दी गई थी। 
Recruitment of police and PAC constable posts in Uttar pradesh
कोर्ट ने कहा कि बिना लिखित परीक्षा के सिपाहियों का चयन करने में कोई अवैधानिकता नहीं है। रणविजय सिंह और दर्जनों अन्य की याचिकाओं पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ ने सुनवाई की। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे, विजय गौतम, सीमांत सिंह आदि ने पक्ष रखा। अधिवक्ताओं का कहना था कि 2008 के नियम 15 में सिपाही भर्ती के लिए प्रारंभिक लिखित और मुख्य लिखित परीक्षा के अलावा शारीरिक दक्षता और मेडिकल परीक्षण का प्रावधान है। 
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Recruitment of police and PAC constable posts in Uttar pradesh
फाइल फोटो
इसी आधार पर भर्तियां होती रही हैं। 2013 की 35500 सिपाही भर्ती भी इसी आधार पर की गई। प्रदेश सरकार ने अचानक नियम बदलते हुए 2015 में 34716 सिपाहियों की भर्ती हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्राप्तांक के आधार पर मेरिट बनाकर करने का निर्णय ले लिया। दलील दी गई कि ऐसा करने से योग्य सिपाहियों का चयन नहीं हो सकेगा। 
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Recruitment of police and PAC constable posts in Uttar pradesh
SSC Job
मेरिट में सिर्फ अंकों को आधार बनाने से वास्तविक क्षमता का पता लगाना मुश्किल होगा। चूंकि सिपाही का पद महत्वपूर्ण होता है और प्रोन्नति पाने के बाद इनको लघु अपराधों की विवेचना भी करनी होती है, इसलिए लिखित परीक्षा अवश्य होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश के तहत अंतिम चयन परिणाम जारी करने पर रोक लगा दी थी।
प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कहा कि पुरानी प्रक्रिया में चयन में दो से तीन वर्ष का समय लग जाता है। 
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