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मंदिरों की कमाई घटी, मस्जिद में हाल पहले जैसा

Sun, 01 Jan 2017 02:06 PM IST
वात्सल्य राय/ बीबीसी संवाददाता
वात्सल्य राय/ बीबीसी संवाददाता Updated Sun, 01 Jan 2017 02:06 PM IST
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Reduced earnings of temples, mosques as before
- फोटो : bbc

धर्म और मंदिरों के शहर मथुरा का मिजाज बीते 50 दिनों में बदल सा गया है। हालांकि आज भी हर तरफ राधे-राधे की गूंज सुनाई देती है पर भजन के सुरों के बीच एक शिकायत भी सुनाई देती है। ये शिकवा है, नोटबंदी की वजह से हो रही दिक्कतों का। कृष्ण भक्तों की आस्था केंद्र मथुरा-वृंदावन के मंदिरों के प्रशासन दावा कर रहे हैं कि नोटबंदी के बाद से चढ़ावे में खासी कमी आई है तो पर्यटकों पर निर्भर रहने वाले कारोबारियों का कहना है कि उनके कारोबार की 'कमर टूट गई' है। पुरोहितों की पीड़ा है कि ज्यादातर यजमानों ने धार्मिक आयोजनों और शादी विवाह के कार्यक्रम तब तक के लिए टाल दिए हैं, जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती।

Reduced earnings of temples, mosques as before
- फोटो : bbc

शहर के बीचों-बीच शाही ईदगाह मस्जिद और श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर की दीवारें सटी हुई हैं। शाही इमाम नोटबंदी के बाद की परेशानियों का जिक्र करते हुए सरकार पर बरस पडते है। कहते हैं, "बुरा न मानें। सरकार की जुबान का मैं कोई एतबार नहीं करता। सरकार सुबह कुछ कहती है तो शाम को कुछ और।" श्रीकृष्ण जन्ममंदिर में पूरी दुनिया से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर प्रशासन का दावा है कि नोटबंदी के बाद से यहां आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या में बड़ी कमी आई है। मंदिर का चढ़ावा भी घटा है।

Reduced earnings of temples, mosques as before
- फोटो : bbc

मंदिर के मुख्य अधिशासी अधिकारी राजीव श्रीवास्तव बताते हैं, "दिसंबर में चढ़ावा घटा है। पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले लगभग 35 फीसदी चढ़ावा कम हुआ है। चेक और ड्राफ्ट से मिलने वाले चढ़ावे में कोई अंतर नहीं आया है।" हालांकि, मंदिर में अभी ई-हुंडी की कोई व्यवस्था नहीं है।

राजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि चढ़ावे में कमी से मंदिर की व्यवस्थाओं पर असर नहीं हुआ है लेकिन सेवा के नए कार्यक्रम को लागू करने का विचार कुछ वक्त के लिए टाल दिया गया है। वे कहते हैं, "मंदिर संस्थान के 180 कर्मचारियों के वेतन का आधा हिस्सा बैंक खातों में भेजा जा रहा है और आधा नकदी में देना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें बैंकों से पैसा निकालने में दिक्कत आ रही है।" वहीं, शाही मस्जिद ईदगाह के इमाम मौलाना अब्दुल वाजिद कहते हैं, "मस्जिद में बाहर से कोई चढ़ावा नहीं आता।

जुमे के दिन नमाजी चंदा देते हैं। नोटबंदी के पहले भी हर जुमे को पांच-सात सौ रुपए आते थे। वो आज भी आ रहे हैं।"

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Reduced earnings of temples, mosques as before
- फोटो : bbc

इमाम वाजिद कहते हैं कि चंदा भले न घटा हो लेकिन रोज़मर्रा की जिंदगी की दिक्कतें बढ़ गई हैं। वह कहते हैं, "मेरे तीन बच्चे हैं। हर तीसरे महीने एक बच्चे की फीस 7200 रुपए जमा करनी होती है। अब यह फीस देना मुश्किल है। सरकार भले ही हफ्ते में 24 हजार रुपए निकालने की सुविधा देने का दावा करती हो, हमें तो अब सिर्फ दो हजार ही मिलता रहा है।"

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Reduced earnings of temples, mosques as before
- फोटो : bbc

मथुरा के प्रसिद्ध श्री द्वारिकाधीश मंदिर के अधिकारी भी नोटबंदी के बाद मंदिर में चढ़ावा कम होने की जानकारी देते हैं। मंदिर के अधिकारी श्रीधर चतुर्वेदी कहते हैं, "भक्तों के पास पैसा घटा है। इसका मंदिर पर भी असर पड़ा है। पहले औसतन छह-सात लाख रुपए मंदिर की गुल्लक में आते थे। इस बार साढ़े चार लाख रुपए निकले हैं। इनमें पुराने नोट भी शामिल हैं।"

मंदिर प्रशासन ने स्वाइप मशीन के लिए आवेदन किया है, लेकिन अभी तक बैंक की ओर से मशीन नहीं मिल पाई है। हालांकि, चतुर्वेदी बताते हैं कि बीते तीन दिनों से मंदिर में बाहर से आने वाले भक्तों की संख्या बढ़ी है।

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