fact check: श्रीलंका के पुलिस लाठीचार्ज के वीडियो को इंदौर का बता कर किया जा रहा है वायरल
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पुलिस लाठी चार्ज के वीडियो का सच
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विस्तार
पूरे देश में लॉकडाउन है ताकि कोरोना वायरस के कहर को रोका जा सके लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ लोग अफवाहें वायरल करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यह दावा किया जा रहा है कि इंदौर पुलिस ने उन लोगों पर लाठीचार्ज किया जिन्होंने 1 अप्रैल को डॉक्टर्स की टीम पर पथराव किया था। अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की और पाया ये दावा फर्जी है।
दावाकर्ता- सोशल मीडिया यूजर्स
दावे का आधार- एक वीडियो क्लिप और उसपर लिखा डिस्क्रिप्शन
क्या किया जा रहा है दावा- वीडियो में यह दावा किया गया है कि इंदौर पुलिस ने डॉक्टरों की टीम पर पथराव करने वालों की पिटाई की है।
पड़ताल के चरण
इस वायरल वीडियो पोस्ट में एक डिस्क्रिप्शन लिखा है 'मामा ऑन फायर... इंदौर #एमपी वही मोहल्ला है जहां डॉक्टरों पर हमला हुआ था..
शेयर तो करना पडेगा, इंसानियत के दुश्मनों को सबक सिखाना पडेगा' और यह कुछ सेकेंड का वीडियो है जिसमें एक मोहल्ला है और कुछ पुलिसवाले लोगों पर लाठीचार्ज कर रहे हैं।
क्या हुआ था इंदौर में 1 अप्रैल को-
एक अप्रैल को इंदौर के टाट पट्टी इलाके में डॉक्टर्स लोगों की स्क्रीनिंग के लिए पहुंचे थे कि उन पर एक ग्रुप ने पथराव कर दिया। वायरल हो रहे वीडियो को इस घटना से जोड़कर फैलाया जा रहा है। इंदौर के टाट पट्टी इलाके में यह घटना हुई थी लेकिन जो वीडियो वायरल किया जा रहा है वह इंदौर के टाट पट्टी इलाके का नहीं है।
वीडियो में क्या दिख रहा है -
- करीब बीस सेकेंड लंबे इस वीडियो में कुछ पुलिसवाले दो लोगों को लाठियों से पीटते हुए नजर आते हैं।
- वीडियो के साथ कैप्शन है 'मामा ऑन फ़ायर... इंदौर #एमपी वही मोहल्ला है जंहा डॉक्टरों पर हमला हुआ था'
- यह कुछ सेकेंड का वीडियो है जिसमें एक मोहल्ला है और कुछ पुलिसवाले लोगों पर लाठीचार्ज कर रहे हैं।
- अंधेरा है और अचानक से पुलिस आती है और लोगों पर लाठी भांजने लगती है।
- इस वीडियो को ऊपर से शूट किया गया है, किसी घर की खिड़की से।
गूगल रिवर्स इमेज सर्च किया और इस तस्वीर के बारे में जानने की कोशिश की, हमें यही वीडियो यूट्यूब प्लेटफार्म पर मिल गया
- यह वीडियो मार्च 28 को अपलोड किया गया था
- इस वीडियो को फ्रेम बाई फ्रेम देखना शुरू किया इसमें विज़ुअल्स तो यही थे लेकिन जानकारी कुछ खास नहीं थी
- एक कैप्शन जरूर लिखा था 'दो ग्रुप्स की झड़प में पुलिस की लाठी से पिट गए तमाशा देखने वाले'
- साथ ही इस वीडियो के साथ मुम्ब्रा पुलिस को भी हैशटैग किया गया था।
फेक न्यूज से सावधान रहें
- इसमें दो लोकल नेताओं के समर्थक आपस में झड़प कर रहे थे।
- इस वीडियो में पूरी घटना का विस्तार से विवरण था।
तुलनात्मक अध्ययन
दोनों वीडियो को ध्यान से देखने पर डॉक्टर्स पर हुई पथरबाजी का वीडियो और पुलिस की लाठीचार्ज का वीडियो अलग-अलग जगह घटित हुई घटना हैं।
इस विषय पर अमर उजाला ने इंदौर के डीआईजी से बातचीत की, उन्होंने बताया, 'यह इंदौर की पुलिस के लाठीचार्ज का वीडियो नहीं है और इसको गलत सूचना के साथ वायरल किया जा रहा है इसका कोई संबंध इंदौर की घटना से नहीं है। साथ ही उन्होंने यह अपील भी की कि इस समय समझदारी से काम लें और झूठी खबरों से सावधान रहें
हरिनारायण मिश्र चारी,डीआईजी,इंदौर
कुछ भी शेयर या फॉरवर्ड करते हुए रखें ख्याल
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में यह दावा गलत साबित किया और पाया यह वीडियो मुम्ब्रा, श्रीलंका का है ना की इंदौर का। भ्रामक और झूठे दावे के साथ वीडियो वायरल किया जा रहा है। हमें केवल कोरोना वायरस के संक्रमण से ही नहीं, इससे जुड़ी हर फेक न्यूज और भ्रामक जानकारियों से भी लड़ना है। खबरों को भी झूठे तथ्यों के संक्रमण से बचाना है।
कोरोना वायरस और फेक न्यूज से सावधानी ही बचाव है।
*Fact Check By Google Certified Fact Checker.