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वाराणसी में बोले महामहिम, 'खोखले शब्दों और नारों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते'

Fri, 13 May 2016 06:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 13 May 2016 06:52 AM IST
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President Pranab Mukherjee tours in Varanasi.
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि खोखले शब्दों और नारों से हम प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते। इसके लिए ठोस कार्ययोजना बनानी होगी। हमें अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना होगा। अधिक से अधिक निवेश करना होगा।
President Pranab Mukherjee tours in Varanasi.
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विभिन्न प्रतियोगियों की मांग और संसाधनों के बीच संतुलन के लिए शिक्षा के क्षेत्र में निवेश की जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार से आग्रह किया। वहीं उच्च शिक्षा में आई गिरावट पर चिंता जाहिर की है। राष्ट्रपति गुरुवार की शाम यहां बीएचयू के स्वतंत्रता भवन सभागार में विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत आयोजित विशेष व्याख्यान सत्र को संबोधित कर रहे थे।
President Pranab Mukherjee tours in Varanasi.
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं कि हमारे पास मेधा नहीं है, लेकिन वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की जरूरत है। हमें शोध की गुणवत्ता बढ़ानी होगी। कहा कि भारत में जीडीपी का मात्र 0.26 प्रतिशत धन ही शोध पर खर्च होता है जबकि जापान, अमेरिका और चीन में शोध और नवाचार पर इससे कई गुना ज्यादा रकम खर्च होता है। भारत को भी इस दिशा में सोचना होगा। सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को मिलकर इसके लिए काम करना होगा।
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President Pranab Mukherjee tours in Varanasi.
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
अपने 25 मिनट के भाषण में प्रणब दा ने कहा कि आने वाले पंद्रह साल में हमारे देश की आधी 25 साल से कम उम्र की होगी। हमें युवाओं की फौज को अपनी पूंजी बनानी होगी। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण, कौशल और रोजगार मुहैया कराना होगा, तभी देश आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत कामगारों का दुनिया का सबसे बड़ा देश होगा। हमें इसका लाभ लेना होगा। इसकी तैयारी अभी से करनी होगी। इसके लिए शोध और नवाचार को प्रोत्साहन बेहद जरूरी है। अगर ऐसा कर पाए तो बेशक हम दुनिया में शीर्ष पर होंगे।
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President Pranab Mukherjee tours in Varanasi.
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
बीएचयू के विजिटर प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हरगोविंद खुराना, चंद्रशेखर सुब्रमण्यम, सीवी रमन और अमर्त्य सेन ऐसी मेधा रहे जिन्होंने भारत में अध्ययन किया और पूरी दुनिया में अपनी चमक बिखेरी। भारत के लिए नोबल पुरस्कार हासिल किया। ये बड़े दुख की बात है कि 1930 के बाद ऐसे किसी भारतीय को नोबल पुरस्कार नहीं मिला जिसने भारत में रहकर शिक्षा हासिल की हो। प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अगर हम शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक पहचान स्थापित करना चाहते हैं तो हमें अपने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ ही उसे रोजगारपरक बनाने की दिशा में काम करना होगा। अनुसंधान के साथ नवाचार पर जोर देना होगा।
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