दुनिया में शायद ही कोई हो, जो रोमन कैथोलिक नन मदर टेरेसा को न जानता हो। उनकी सेवा भावना ने भारत ही नहीं दुनिया भर का दिल जीत लिया। कोलकाता की सड़कों पर 45 सालों तक गरीबों और बीमार लोगों की सेवा करने वाली मदर टेरेसा की मानवीयता के सामने पूरी दुनिया झुकी। आज उनकी 19वीं पुण्यतिथि है। दुनिया भर से अलग-अलग देशों के लोग मदर टेरेसा का आशीर्वाद लेने आते थे। इनमें आम लोगों के साथ राष्ट्राध्यक्ष होते, तो शाही घरानों के लोग भी।
दूसरों की सेवा में समर्पित मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार और 1980 में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया। मदर टेरेसा की सेवा भावना का दायरा कितना बड़ा था। यह इस बात से समझा जा सकता है कि मृत्यु के समय उनकी संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी 123 देशों में 610 मिशन नियंत्रित कर रही थी। ये मिशन दुनिया भर में मदर टेरेसा के काम को आगे बढ़ा रहे हैं।
कोलकाता में गरीबों के लिए काम करने वाली रोमन कैथोलिक नन मदर टेरेसा को संत घोषित किया गया। मदर को संत घोषित किया जाना उनकी सेवा से हुए चमत्कार को मान्यता दिया जाना है। पांच सितंबर को वेटिकन सिटी में मदर टेरेसा को संत की उपाधि दी जाएगी और उस समय दुनिया भर के प्रतिष्ठित लोग मदर की सेवा भावना में खड़े होंगे। हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब ऐसा होगा। मदर टेरेसा के जिंदा रहते ही दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष उनसे मिलने आते और उनकी मानवीयता में भींगकर खुद को पवित्र कर लेते।
प्रिंसेस डायना के साथ मदर टेरेसा।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव रहे कोफी अन्नान के साथ मदर टेरेसा।
ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स के साथ मदर टेरेसा।
अमेरिका की तत्कालीन पहली महिला हिलेरी क्लिंटन के साथ मदर टेरेसा।