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Manoj Kumar: 'भारत कुमार' सिर्फ एक नाम नहीं, जिम्मेदारी भी; उनका असाधारण व्यक्तित्व आम लोगों के लिए प्रेरणा

Sat, 05 Apr 2025 05:43 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 05 Apr 2025 05:43 AM IST
सार

Manoj Kumar Passed Away: भारत कुमार' के नाम से मशहूर मनोज कुमार ने शुक्रवार सुबह साढ़े तीन बजे के आसपास अंतिम सांसें लीं। दोपहर बाद विशाल टॉवर, जुहू में उनके अंतिम दर्शन किए गए। आज सुबह पवन हंस श्मशान घाट, जुहू में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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Manoj Kumar Passes Away: 'Bharat Kumar' is not just name his extraordinary personality is an inspiration
मनोज कुमार का निधन - फोटो : ANI

दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार का बीते दिन मुंबई में निधन हो गया। उन्होंने ‘पूरब और पश्चिम’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ जैसी फिल्मों में उभरते भारत की तस्वीर से लेकर विभाजन के दर्द तक को बखूबी बयां किया। दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित अभिनेता मनोज कुमार ने एक बार कहा था, “मैं तो एक साधारण नागरिक हूं, लेकिन देशवासियों ने भारत कुमार का नाम देकर मुझ पर बड़ा उपकार किया है। भारत का यह जो ताज मुझे दिया गया है, उसे व्यक्तिगत जीवन में निभाना बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।” खुद को साधारण नागरिक बताने वाले मनोज कुमार का असाधारण व्यक्तित्व न सिर्फ फिल्म जगत, बल्कि आम लोगों को भी हमेशा प्रेरित करता रहा है। ‘शहीद’, ‘क्रांति’ और ‘उपकार’ जैसी फिल्में आज भी लोगों में देशभक्ति का जोश जगा देती हैं।





मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई, 1937 को अविभाजित भारत के एबटाबाद शहर (अब पाकिस्तान) में एक पंजाबी हिंदू परिवार में हुआ था और उस समय उनका नाम हरिकिशन गिरि गोस्वामी रखा गया था। विभाजन के समय उनका परिवार पाकिस्तान छोड़कर भारत आ गया और उन्होंने कुछ माह दिल्ली के शरणार्थी कैंप में भी गुजारे। 1957 में फिल्म ‘फैशन’ में एक छोटी-सी भूमिका के साथ उन्होंने रुपहले परदे पर कदम रखा। फिर सहारा (1958), चांद (1959) और हनीमून (1960) जैसी फिल्मों में दिखे, लेकिन कोई खास कमाल नहीं दिखा सके। 1965 में आई उनकी देशभक्ति फिल्म ‘शहीद’ न केवल बॉक्स ऑफिस पर हिट रही, बल्कि इसने आलोचकों को भी जवाब दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से भी उनको प्रशंसा मिली।

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मनोज कुमार के साथ पीएम मोदी - फोटो : X/@narendramodi

मेरे देश की धरती... हर जुबां पर चढ़ा
‘उपकार’ मनोज कुमार के निर्देशन में पहली फिल्म थी। 1967 में आई इस फिल्म का गाना ‘मेरे देश की धरती...’ बेहद लोकप्रिय हुआ था। 1960 और 1970 के दशक में उनकी फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर बोलबाला रहा। उन्होंने ‘पूरब और पश्चिम’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ जैसी फिल्मों में उभरते भारत की तस्वीर से लेकर विभाजन के दर्द को बखूबी बयां किया। ‘पूरब और पश्चिम’ यूके में भी रिलीज की गई, जहां इसने 50 सप्ताह से अधिक समय तक थिएटर में लगे रहने का रिकॉर्ड बनाया था।

यह भी पढ़ें- मासूम इतने कि भौंरे से डर जाते मनोज कुमार, सायरा बानो ने साझा किए अभिनेता से जुड़े दिलचस्प किस्से

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मनोज कुमार - फोटो : ANI

दिलीप कुमार के जबरा फैन
मनोज कुमार बचपन से ही दिलीप कुमार की फिल्में बड़े शौक से देखते थे। दिलीप कुमार की फिल्म ‘शबनम’ 1949 में रिलीज हुई। मनोज कुमार की उम्र महज 11 साल थी। फिल्म में दिलीप कुमार के निभाए किरदार का नाम मनोज था। इसने हरिकिशन गिरि गोस्वामी को इस कदर प्रभावित किया कि उन्होंने तभी तय कर लिया कि अगर कभी अभिनेता बने तो अपना नाम मनोज कुमार ही रखेंगे। बाद में फिल्मों में कदम रखने के बाद उन्होंने ऐसा किया भी। कई वर्षों बाद उस समय मनोज कुमार की खुशी का कोई ठिकाना न रहा, जब दिलीप कुमार ने उनकी फिल्म ‘क्रांति’ में अभिनय के लिए हामी भर दी।

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मनोज कुमार - फोटो : ANI

‘क्रांति’ कॅरिअर की आखिरी बड़ी सफलता
मनोज कुमार को पहली बड़ी सफलता 1962 में आई फिल्म ‘हरियाली और रास्ता’ से मिली। इसके बाद ‘वो कौन थी?’ भी काफी सफल रही। उन्होंने देशभक्ति से भरपूर फिल्मों के अलावा ‘हिमालय की गोद में’, ‘दो बदन’, ‘सावन की घटा’ और ‘गुमनाम’ जैसी फिल्मों में रोमांटिक किरदार भी निभाए। 1981 में आई देशभक्ति से भरपूर फिल्म ‘क्रांति’ उनके कॅरिअर की आखिरी बड़ी सफलता थी। इसके बाद उन्होंने ‘मुझे इन्साफ चाहिए’, ‘क्लर्क’ और ‘देशवासी’ जैसी कुछ फिल्में की। 1995 में आई ‘मैदान-ए-जंग’ उनकी आखिरी फिल्म थी।

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मनोज कुमार, लता मंगेशकर - फोटो : ANI

‘उपकार’ ने जीते चार फिल्मफेयर
1968 में ‘उपकार’ ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ डायरेक्टर, सर्वश्रेष्ठ कहानी और सर्वश्रेष्ठ संवाद श्रेणी में चार पुरस्कार जीते। 1972 में फिल्म ‘बेईमान’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और ‘शोर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ संपादन, 1975 में ‘रोटी कपड़ा और मकान’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए फिल्मफेयर मिला। 1999 में मनोज कुमार को फिल्मफेयर ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया। 1968 में ‘उपकार’ को दूसरी सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। 2008 में किशोर कुमार अवार्ड और 2010 में राज कपूर अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।

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