भारतीय सेना के दिवंगत मेजर शैतान सिंह की आज जयंती है। उन्होंने 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध में अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया था। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना के 120 जवानों ने चीन के पांच-छह हजार सैनिकों को धूल चटाई थी। इस युद्ध में मेजर सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए, लेकिन चीन को उन्होंने जो सबक सिखाया उसे आज तक याद किया जाता है। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र दिया गया था।
2 of 7
चीनी सेना पर नजर बनाए हुए भारतीय सैनिक
- फोटो : Social Media
मेजर शैतान सिंह का जन्म 1 दिसंबर 1924 को राजस्थान के जोधपुर जिले के बंसार गांव के एक राजपूत परिवार में हुआ था। उनके पिता लेफ्टिनेंट कर्नल हेम सिंह थे जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फ्रांस में भारतीय सेना में सेवा दी थी। इसके लिए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एंपायर (ओबीई) से सम्मानित किया था। वहीं मेजर शैतान सिंह एक अगस्त 1949 को अधिकारी के तौर पर जोधपुर राज्य बल में शामिल हुए थे।
3 of 7
सीमा पर तैनात भारतीय सैनिक
- फोटो : Social Media
साल 1962 में नवंबर महीने के 18वें दिन, देश में दिवाली की धूम थी वहीं लद्दाख की बर्फ से ढकी चुशुल घाटी इतिहास रचने जा रही थी और इस बात की भनक किसी को लगी नहीं थी। तड़के साढ़े तीन बजे शांत घाटी में गोलियों की गंध घुलनी शुरू हो गई थी।
4 of 7
भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गोलीबारी
- फोटो : Social Media
पांच से छह हजार की संख्या में चीनी जवानों ने लद्दाख पर हमला कर दिया था। इस दौरान सीमा पर मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व वाली टुकड़ी देश की सीमा की सुरक्षा कर रही थी। इस टुकड़ी में केवल 120 जवान थे। लेकिन मुट्ठीभर जवान चीन को ऐसा सबक सिखाएंगे, इस बात की कल्पना तो दुनिया ने नहीं की थी। जवानों ने किस अंदाज में यह जंग लड़ी थी उसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि 120 सैनिकों ने चीन के करीब 1300 जवानों को मौत के घाट उतार दिया था।
5 of 7
अस्थाई कैंप बनाकर इलाके की रक्षा करते भारतीय सैनिक
- फोटो : Social Media
इस टुकड़ी के पास न तो आधुनिक हथियार थे और न ही तकनीक। हथियार के नाम पर इनके पास थी सिर्फ वीरता। जिसका लोहा बाद में पूरी दुनिया ने माना। 120 जवानों की इस टुकड़ी का नेतृत्व मेजर शैतान सिंह कर रहे थे। कहा जाता है कि गिन पाना मुश्किल था कि शैतान सिंह ने अकेले ही कितने चीनी सैनिकों को मार डाला था। इतना ही नहीं वो अपने साथियों को लगातार प्रोत्साहित कर रहे थे। इसी बीच उन्हें कई गोलियां लगीं।