भारतीय मूल के दिग्गज ब्रिटिश कारोबारी और कपारो समूह के संस्थापक लॉर्ड स्वराज पाल को दुनिया उनके लंबे-चौड़े कारोबारी साम्राज्य के साथ-साथ उनके परोपकारी कार्यों के लिए भी याद रखेगी, जिसकी शुरुआत 60 के दशक में तब हुई जब उन्होंने अपनी महज चार वर्ष की बेटी को बीमारी के कारण गंवा दिया। उनकी परोपकारी संस्था अंबिका फाउंडेशन दुनियाभर में बच्चों-युवाओं की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर लाखों रुपये खर्च करती रही है।
स्वराज पॉल: उद्यमिता के साथ-साथ परोपकार की अनमोल विरासत छोड़ी, पिता चलाते थे इस्पात ढलाई कारखाना
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 23 Aug 2025 08:16 AM IST
सार
94 साल की आयु में दुनिया को अलविदा कहने वाले भारतीय मूल के दिग्गज उद्योगपति लॉर्ड स्वराज पाल अपने पीछे उद्यमिता के साथ-साथ परोपकार की विरासत भी छोड़ गए हैं। 1978 में उन्हें ब्रिटिश महारानी से नाइटहुड की उपाधि मिली थी। निजी जीवन में कई हृदयविदारक दुख झेलने वाले लॉर्ड के पिता इस्पात ढलाई कारखाना चलाते थ। जानिए इनके जीवन से जुड़ी प्रेरक बातें
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