भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से सांसद उदित राज का पत्ता काटते हुए गायक हंस राज हंस को टिकट दे दिया है। एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के मुद्दे पर उदित राज कई बार पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर बोलते नजर आए हैं। इसलिए उनका टिकट कटने की अटकलें पहले से ही लगाई जा रही थीं। आगे पढ़िए वो कौन से बयान हैं जिनसे उदित राज का टिकट कटना तय माना जा रहा था-
एससी-एसटी एक्ट में बदलाव को लेकर पूरे देश में 2 अप्रैल 2018 को दलित संगठनों ने बंद बुलाया था। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में एससी/एसटी अधिनियम को लेकर सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी। उस समय उदित राज दलित मसलों पर सरकार की लाइन के विरुद्ध जाकर बोलते नजर आए थे। उन्होंने कहा था कि अनुसूचित जाति और जनजाति को संविधान में मिला आरक्षण खतरे में है।उनके अनुसार उन्होंने ये बात बार-बार भाजपा के फोरम पर उठाई लेकिन पार्टी ने उनकी बात अनसुनी कर दी।
जुलाई 2018 में लोकसभा में शून्यकाल के दौरान उन्होंने भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर को रिहा करने की मांग उठाई थी। वो जस्टिस एके गोयल की एनजीटी चेयरमैन के तौर पर नियुक्ति की आलोचना कर रहे थे। न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति में आरक्षण की मांग करते हुए उन्होंने कहा था कि 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट को खत्म कर दिया था, लेकिन उसके बाद इसे संसद से लाकर मजबूत किया गया। इसी तरीके से विश्वविद्यालय और कॉलेजों में आरक्षण होता था, उसे भी न्यायपालिका ने खत्म कर दिया। हम इस न्यायपालिका को भेदभाव वाला मानते हैं।
उदित राज ने दिल्ली में 'सेव रिजर्वेशन' नाम से एक विशाल रैली निकाली थी। आरक्षण पर भाजपा में उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेने की बात करते हुए उन्होंने कहा था कि मैं भाजपा के साथ राजनीतिक रूप से हूं, सैद्धांतिक रूप से नहीं। मैं आंबेडकरवादी हूं। मैं बुद्धिस्ट हूं। मैं भाजपा में हूं पर आरएसएस में नहीं हूं।
2 अप्रैल को बुलाए गए भारत बंद का समर्थन करते हुए उदित राज ने कहा था कि दलितों का भारत बंद का आह्वान हैरान करने वाला है, क्योंकि इसके पीछे कोई बड़ा नेता नहीं है। दलित खुद एकजुट होकर भारत बंद में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस गुस्से को समझने की जरूरत है और इसके बारे में कदम उठाना चाहिए। रोजगार नहीं मिलने और दलितों के खिलाफ हिंसा के मामलों को लेकर उनके मन में असंतोष है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दलितों के और भड़का दिया है।