राधारानी की नगरी बरसाना सोमवार को भाव और भक्ति के अनूठे रंगों में सराबोर रही। एक ओर नंदगांव के हुरियारे ढाल लेकर बरसाना पहुंचे तो दूसरी ओर बरसाना की हुरियारिनें लाठियां लेकर रंगीली गली में तैयार थीं।
होली के गीतों की गूंज बीच शुरुआत हुई लठामार होली की। इस समय रंगीली गली में हर हुरियारा कृष्ण और उनके सखा ग्वालबालों का रूप तो हर हुरियारिन राधारानी और उनकी सखियों का रूप लिए थी।
ढाल पर लठों की चोट पड़ते ही लाड़ले-लाड़ली की जय-जयकार गूंज उठती। आनंद इतना था कि देश और विदेश से करीब चार लाख श्रद्धालु इस लीला के साक्षी बनने बरसाना पहुंचे।
सोमवार की सुबह से ही बरसाना के हर घर में उत्सव शुरू हो गया। गली-गली में बस यही चर्चा रही कि नंदगांव से हुरियारों की टोली कब आने वाली है।
बरसाना की हुरियारिन अपने प्रेम पगे लठों के साथ होली खेलने को तैयार थीं। श्रीजी मंदिर में भी सुबह से ही गुलाल के बदरा दिखाई देने लगे। दोपहर को जैसे ही नंदगांव के हुरियारों की टोली बरसाना पहुंची तो उल्लास छा गया।