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बड़ी रोचक है तिरंगे की कहानी, अब तक 6 बार बदला जा चुका है रंग रूप
विकास जांगड़ा/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 25 Jan 2017 10:23 PM IST
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भारतीय ध्वज
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हर देश का अपना एक राष्ट्रीय ध्वज होता है, जो कि उसकी कहानी को बयां करता है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज जिसे आज 'तिरंगा' भी कहा जाता है कि कहानी भी बड़ी रोचक है। अपने वर्तमान रूप में आने से पहले भारत के ध्वज ने 6 बार अपना रंग रूप बदला।
भारतीय ध्वज
पहला तिरंगा
सबसे पहले तिरंगे को 7 अगस्त, 1906 को कलकत्ता (वर्तमान में कोलकाता) के पारसी बागान स्क्वेयर में फहराया गया था। इस झंडे में तीन रंग की पट्टियां थी। जिनमें बीच की पट्टी पर वंदे मातरम लिखा था। इस बीच में सफेद की बजाए पीली पट्टी थी। वहीं नीचे की पट्टी लाल थी जिस पर अर्ध चंद्र और सूरज बना था। इसके अलावा सबसे ऊपरी हरी पट्टी पर कमल का फूल अंकित था।
सबसे पहले तिरंगे को 7 अगस्त, 1906 को कलकत्ता (वर्तमान में कोलकाता) के पारसी बागान स्क्वेयर में फहराया गया था। इस झंडे में तीन रंग की पट्टियां थी। जिनमें बीच की पट्टी पर वंदे मातरम लिखा था। इस बीच में सफेद की बजाए पीली पट्टी थी। वहीं नीचे की पट्टी लाल थी जिस पर अर्ध चंद्र और सूरज बना था। इसके अलावा सबसे ऊपरी हरी पट्टी पर कमल का फूल अंकित था।
भारतीय ध्वज
बर्लिन कमेटी का झंडा
यह भी पहले झंडे से काफी कुछ मिलता जुलता था। इसमें बीच की पीली पट्टी पर वंदे मातरम लिखा था। इसमें ऊपरी पट्टी पर कमल के फूल की बजाए सात तारे छपे थे, जो कि सप्तर्षि का तारामंडल का प्रतीक थे। इसे 1907 में मैडम काम ने फहराया था। साथ ही इसे बर्लिन में आयोजित एक सभा में भी भारत के झंडे के रूप में फहराया गया।
यह भी पहले झंडे से काफी कुछ मिलता जुलता था। इसमें बीच की पीली पट्टी पर वंदे मातरम लिखा था। इसमें ऊपरी पट्टी पर कमल के फूल की बजाए सात तारे छपे थे, जो कि सप्तर्षि का तारामंडल का प्रतीक थे। इसे 1907 में मैडम काम ने फहराया था। साथ ही इसे बर्लिन में आयोजित एक सभा में भी भारत के झंडे के रूप में फहराया गया।
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होम रूल आंदोलन का झंडा
इसके बाद तीसरी बार भारत का झंडा सामने आया नए रूप में होम रूल आंदोलन के दौरान। 1917 में इस झंडे को होम एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने फहराया था। इस झंडे में पांच लाल और चार हरी पट्टियां थीं। इन पर सात तारे अंकित थे। इसके बाएं कोने में ऊपरी ओर ब्रिटेन का आधिकारिक झंडा भी छपा था।
इसके बाद तीसरी बार भारत का झंडा सामने आया नए रूप में होम रूल आंदोलन के दौरान। 1917 में इस झंडे को होम एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने फहराया था। इस झंडे में पांच लाल और चार हरी पट्टियां थीं। इन पर सात तारे अंकित थे। इसके बाएं कोने में ऊपरी ओर ब्रिटेन का आधिकारिक झंडा भी छपा था।
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अनौपचारिक तिरंगा झंडा
1921 में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की एक बैठक में आयोजित एक युवा ने गांधी जी को यह झंडा दिया। यह तीन रंग की पट्टियों से बना था और इस पर नीले रंग में चरखा अंकित था। इसके तीन रंगों सफेद रंग सबसे ऊपर, उसके नीचे हरा रंग और सबसे नीचे लाल रंग था।
1921 में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की एक बैठक में आयोजित एक युवा ने गांधी जी को यह झंडा दिया। यह तीन रंग की पट्टियों से बना था और इस पर नीले रंग में चरखा अंकित था। इसके तीन रंगों सफेद रंग सबसे ऊपर, उसके नीचे हरा रंग और सबसे नीचे लाल रंग था।