उत्तर प्रदेश के कानपुर में हिस्ट्रीशीटर और कुख्यात अपराधी विकास दुबे पर आठ पुलिसकर्मियों को मारे जाने का आरोप है। एक जुलाई 2020 को पुलिस की टीम विकास दुबे को पकड़ने के लिए उसके घर बिकरू गांव में गई, लेकिन उसे इस बात की जानकारी पहले ही मिल गई थी।
विकास दुबे ने ताजा करा दी देश के इन कुख्यात अपराधियों की याद, जानिए इनका इतिहास
दाऊद इब्राहिम
दाऊद इब्राहिम का जन्म महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था। उसके पिता शेख इब्राहिम अली कास्कर मुंबई पुलिस में हवलदार थे। स्कूल में पढ़ाई के दौरान बुरी संगत में पड़े दाऊद ने चोरी, डकैती और तस्करी शुरू कर दी थी और वह जुर्म की दुनिया में आगे बढ़ता रहा।
मुंबई में उन दिनों अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला गैंग का राज हुआ करता था। दाऊद भी इस गैंग के लिए काम करने लगा। सन 80 के दशक में चोरी और तस्करी करने वाला दाऊद जरायम की दुनिया का बड़ा नाम बन गया। वह फिल्म फाइनेंसिंग और सट्टेबाजी का भी काम करने लगा। इसी दौरान उसकी मुलाकात छोटा राजन से हुई और दोनों ने मिलकर भारत के बाहर काम करना शुरू कर दिया।
जुलाई 2005 में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने दाऊद इब्राहिम को उसके ठिकाने पर घुसकर मारने की योजना बनाई। एजेंसियों को ये पक्की जानकारी थी कि रिसेप्शन में दाऊद जरूर आएगा, इसके लिए छोटा राजन गैंग के दो शॉर्प शूटर्स को ट्रेनिंग दी गई। लेकिन दाऊद को मारने का प्लान लीक हो गया और मुंबई पुलिस में मौजूद दाऊद के कुछ लोगों ने दोनों शॉर्प शूटर्स को गिरफ्तार कर लिया।
हालांकि अभी कुछ दिन पहले दाऊद इब्राहिम के कोरोना से मौत की खबर आई थी लेकिन बाद में इसकी पुष्टि नहीं हुई।
करीम लाला
करीम लाला का पूरा नाम अब्दुल करीम शेर खान था। 1911 में अफगानिस्तान में करीम लाला का जन्म हुआ था, जिंदगी में बड़ा काम करने की चाहत में करीम लाला मुंबई आया और यहां आकर छोटे मोटे काम करने शुरू किए। करीम लाला ने सबसे पहले मुंबई के ग्रांट रोड पर एक किराए का घर लिया और वहां सोशल क्लब के नाम से जुए का अड्डा खोला।
जुए के धंधे के बाद करीम लाला ने सोने, कीमती गहनों, हीरे की तस्करी करना शुरू किया और आजादी के पहले से इस धंधे से खूब पैसा कमाया। बाद में करीम लाला तस्करी के धंधे के किंग के नाम से मशहूर हो गया और इसके बाद उसने मुंबई में कई जगहों पर दारू के के ठेके भी खोल लिए।
मुंबई अंडरवर्ल्ड में 1981 से 1985 के बीच करीम लाला गैंग और दाऊद इब्राहिम के बीच गैंगवार हुआ। नतीजतन दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी ने धीरे धीरे करीम लाला के पठान गैंग का सफाया कर दिया इस गैंगवार में दोनों गुटों के दर्जनों लोग मारे गए और 90 साल की उम्र में 19 फरवरी 2002 को मुंबई में करीम लाला की मौत हो गई।
छोटा राजन
छोटा राजन और दाऊद इब्राहिम एक समय में साथ थे लेकिन मुंबई ब्लास्ट के बाद इन दोनों के रास्ते अलग हो गए थे। छोटा राजन को दाऊद का राइट हैंड भी कहा जाता था लेकिन साल 2000 में छोटा राजन पर दाऊद इब्राहिम के गुर्गों ने हमला करवाया लेकिन उस वक्त गोलियां लगने के बाद भी राजन जिंदा था।
फिरौती, जालसाजी, धोखाधड़ी, तस्करी आदि के मामले में छोटा राजन को पकड़ने के लिए जब मुंबई पुलिस ने अभियान चालाया तो वह सिंगापुर भाग गया। कई बार राजन की मौत की खबरें सामने आईं लेकिन एक भी सच साबित नहीं हुई।
दाऊद और छोटा राजन की दुश्मनी तब पुख्ता हुई, जब राजन ने दाऊद को जानकारी दिए बिना ही शिवसेना के नगर सेवक खीम बहादुर थापा को मार गिराया था। ऐसा कहा जाता है कि थापा के दाऊद से अच्छे संबंध थे। राजन को उसके दोस्त अबू सलेम ने चेताया कि वह दाऊद से सावधान रहे तभी से राजन अलग हो गया।
रवि पुजारी
जब मुंबई में अंडरवर्ल्ड डॉन पैर पसार रहा था तब रवि पुजारी छोटा राजन का शॉर्प शूटर के तौर पर काम करता था। साल 1993 में छोटा राजन और दाऊद इब्राहिम अलग हुए तो रवि पुजारी भी छोटा राजन से अलग होकर बैंकॉक चला गया और वहां जाकर अपना अलग गैंग बना लिया।
बैंकॉक में रहने के दौरान रवि पुजारी रंगदारी के धंधे का बड़ा खिलाड़ी बन गया और बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारों को धमकाने में रवि पुजारी का नाम सामने आने लगा। रवि पुजारी पर हत्या और फिरौती के 200 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। रवि पुजारी 15 साल से फरार था लेकिन फरवरी 2020 में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने रवि पुजारी को गिरफ्तार कर लिया था।
1995 का चर्चित मामला प्रकाश कुकरेजा हत्याकांड सुर्खियों में आया, इस हत्या में ये गैंग शामिल था। 2003 में नवी मुंबई में बिल्डर सुरेश वाधवा की हत्या की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हो पाया, बाद में 2005 में पुजारी के कहने पर ही वकील माजिद मेनन की हत्या कर दी गई।