बरसाना की रंगीली होली के अगले ही दिन श्रीराधारानी और उनकी सखियां होली का फगुवा (नेग) मांगने नंदभवन (नंदगांव) में पहुंच गई। बहाना फगुवा और मन में लालसा कन्हैया से एक बार और होली खेलने की थी। इधर नंदगांव के हुरियारे भी बरसाने में हार का बदला लेने की मंशा लिए थे। होली के लिए दोनों ही तरफ बेताबी रही। शाम होते-होते होली का ये उल्लास अपने शिखर पर पहुंच गया। प्रेम पगी लाठियों ने अलौकिक प्रेम बरसाया।
नंदभवन में पीला पटुका लपेटे पहुंचा गोस्वामी बालक
दोपहर के ढाई बजे नंदभवन में एक हाथ में पिचकारी लिए और गले में पीला पटुका लपेटे गोस्वामी बालक पहुंचा और खबर दी कि बरसाने वाले यशोदाकुंड स्थित गोशाला में आ चुके हैं।
गोप-ग्वाले बरसाना से आए हुरियारों को रंग से सराबोर करते हैं
रंग-बिरंगी पागों और दुपट्टों से हुरियारों का सिर सजा हुआ है। नंदगांव के गोप-ग्वाले बरसाना से आए हुरियारों को टेसू के फूलों के रंग से सराबोर करने लगते हैं। होली के पदों के साथ अबीर-गुलाल हवाओं में तैरने लगता है। सभी समाजी एकत्रित होते हैं और पारंपरिक वेशभूषा से सुसज्जित नंदगांव, बरसाना के ग्वालवालों के मध्य अष्टछाप के कवियों के पदों का संयुक्त समाज गायन शुरू करते हैं।
महिलाएं सितारे जड़े लहंगा-चुनरी पहन दरवाजे पर खड़ी होने लगीं
समाज गायन में ठाकुरजी को अनुराग युक्त गालियां भी सुनाई जाती हैं। इधर महिलाएं सितारे जड़े लहंगा-चुनरी पहन लंबा घूंघट काढ़कर अपने-अपने दरवाजे पर खड़ी होने लगीं। वहीं नंदभवन में करीब एक घंटे तक रंगों से सराबोर होने के बाद बरसाने के हुरियारे नंदगांव की गोपियों से हंसी-मजाक करते हुए रंगीली गली से निकलने लगे।
इत आईं ब्रजबाल, मृगनैनी गज गामिनी...
गोपियों के साथ होली के रसियों का गायन कर नृत्य किया। सोलह शृंगार से सजी ग्वालिन लाठी लिए तैयार थीं। इत आईं ब्रजबाल, मृगनैनी गज गामिनी, टेके हैं मदन गुपाल, घन घेरयौ जनौं दामिनी। गोपियों को उकसाने के लिए हुरियारे उनको प्रेम पगी गालियां सुनाते हुए होली चौक पर एकत्र होने लगे।