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इस राजा की देन थी समलैंगिकता कानून, सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसले में किया जिक्र

Sat, 08 Sep 2018 03:39 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 08 Sep 2018 03:39 PM IST
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Henry VIII King of England made law of homosexuality, Supreme Court also mentioned in the verdict

समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखने वाली आईपीसी की धारा 377 को आंशिक रूप से निरस्त करने वाले उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में 158 साल पुराने इस प्रावधान के इतिहास का जिक्र किया जिसे 1533 में ब्रिटेन के राजा हेनरी अष्टम के शासनकाल में बनाए गए कानून से लिया गया। 

Henry VIII King of England made law of homosexuality, Supreme Court also mentioned in the verdict

बगरी अधिनियम के जरिये मानव जाति या जानवर के साथ बगरी (गुदा मैथुन) के "निंदनीय और घृणित अपराध" को प्रतिबंधित किया गया था। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में कहा कि "बगरी" शब्द पुराने फ्रांसीसी शब्द "बुग्रे" से लिया गया है और इसका मतलब गुदा मैथुन होता है।

Henry VIII King of England made law of homosexuality, Supreme Court also mentioned in the verdict

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में कहा, "हेनरी अष्टम द्वारा बनाया गये बगरी अधिनियम, 1533 में बगरी के लिये मौत की सजा का प्रावधान था और यह कानून तकरीबन 300 साल तक रहा। उसके बाद इसे रद्द कर दिया गया और उसकी जगह व्यक्ति के खिलाफ अपराध अधिनियम, 1828 बनाया गया। 

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Henry VIII King of England made law of homosexuality, Supreme Court also mentioned in the verdict

बगरी, हालांकि आईपीसी बनाए जाने के एक साल बाद यानि 1861 तक इंग्लैंड में एक ऐसा अपराध बना रहा, जिसके लिये मौत की सजा का प्रावधान था।’’ उन्होंने कहा कि धारा 377 को संविधान के अनुच्छेद 372 (1) के तहत स्वतंत्र भारत में जारी रखने की इजाजत दी गई। 

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Henry VIII King of England made law of homosexuality, Supreme Court also mentioned in the verdict

अनुच्छेद 372 (1) के अनुसार, "संविधान के लागू होने से पहले से प्रभावी सभी कानून तब तक जारी रहेंगे जब तक कि उन्हें बदल नहीं दिया जाता या निरस्त नहीं कर दिया जाता।’’ न्यायमूर्ति नरीमन ने कहा कि इंग्लैंड और वेल्स में "अप्राकृतिक यौनाचार, गंभीर अश्लीलता या अन्य अप्राकृतिक आचरणों" के लिए 1806 और 1900 के बीच 8921 लोगों को दोषी पाया गया। 

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