एसटी परिषद ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) चोरी रोकने के लिए अहम कदम उठाया है। बीते दिन हुई बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। इसमें कर चोरी की आशंका वाली कुछ वस्तुओं के लिए 'ट्रैक एंड ट्रेस' तंत्र लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी देना भी शामिल है। इसके तहत ऐसी वस्तुओं या पैकेट पर एक विशिष्ट चिह्न लगाया जाएगा, ताकि आपूर्ति श्रृंखला में उनका पता लगाया जा सके।
GST Council: कर चोरी रोकने के लिए जीएसटी परिषद का बड़ा कदम, 'ट्रैक एंड ट्रेस' तंत्र को मंजूरी दी; जानें सबकुछ
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प्रणाली के बारे में जानिए
वित्त मंत्रालय ने परिषद की 55वीं बैठक में लिए गए निर्णयों के बारे में बताते हुए कहा कि यह प्रणाली विशिष्ट पहचान चिह्न पर आधारित होगी। इसे वस्तुओं या उनके पैकेट पर चिपकाया जाएगा। इससे ऐसी प्रणाली विकसित करने के लिए कानूनी ढांचा उपलब्ध होगा। इसके अलावा आपूर्ति श्रृंखला में निर्दिष्ट वस्तुओं का पता लगाने के लिए तंत्र के कार्यान्वयन में मदद भी मिलेगी।
वित्त मंत्रालय ने क्या बताया?
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, 'यह स्पष्ट किया जाता है कि अपंजीकृत प्राप्तकर्ताओं को ऑनलाइन मनी गेमिंग, ओआईडीएआर सेवाओं आदि जैसी ऑनलाइन सेवाओं की आपूर्ति के संबंध में आपूर्तिकर्ता को कर चालान पर अपंजीकृत प्राप्तकर्ता के राज्य का नाम अनिवार्य रूप से दर्ज करना आवश्यक है और प्राप्तकर्ता के राज्य का ऐसा नाम आईजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 12(2)(बी) के प्रयोजन के लिए प्राप्तकर्ता के रिकॉर्ड में दर्ज पता माना जाएगा, जिसे सीजीएसटी नियम, 2017 के नियम 46(एफ) के प्रावधान के साथ पढ़ा जाएगा।'
पॉपकॉर्न पर जीएसटी को लेकर साफ किया रुख
जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि पहले से पैक और लेबल के साथ पॉपकॉर्न पर 12% का टैक्स लगाया जाएगा। अगर इसमें चीनी मिलाई गई है तो उस पर 18% की दर से जीएसटी जीएसटी लागू रहेगा। इसकी कीमतों पर परिषद अलग से सर्कुलर जारी करेगी। पॉपकॉर्न पर पहले जैसे ही तीन तरह के टैक्स लगेंगे। पहला नमक और मसाले मिलाकर खाने के लिए तैयार किए गए और पैक्ड हैं, लेकिन उन पर कोई लेबल नहीं लगा है। ऐसे पैक्ड पॉपकॉर्न पर 5% जीएसटी लागू होगा। पैकेट पर लेबल भी लगा है तो उस पर जीएसटी बढकर 12 फीसदी हो जाएगा। ये सभी टैक्स पहले से ही लागू हैं, अब इनको स्पष्ट कर दिया गया है। वित्त मंत्री ने मीडिया में दुष्प्रचार से बचने की अपील करते हुए कहा, ये सभी टैक्स पहले से ही लागू हैं। जीएसटी ने अब इन्हें स्पष्ट किया है।
पुराना वाहन खरीदना होगा महंगा
अगर आप पुराने वाहन खरीदने के इच्छुक हैं, तो अब इस पर 18% जीएसटी देना होगा। पहले यह दर 12% थी। यह तब लागू होगी, जब आप किसी कंपनी से खरीद रहे हैं। जीएसटी केवल खरीद-बिक्री पर होने वाले लाभ पर लगेगा। अगर किसी व्यक्ति से खरीद रहे हैं, तो कोई टैक्स नहीं लगेगा। नए इलेक्ट्रिक वाहन पर पहले की तरह 5% जीएसटी लगेगा। जीएसटी परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्ज की शर्त नहीं मानने वाले ग्राहकों पर बैंक या वित्तीय संस्थान कोई जुर्माना लगाते हैं, तो उस पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा।