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Tax: पॉपकॉर्न पर पहले जैसे ही तीन टैक्स, अब पुराने वाहन खरीदने पर GST 18%; 148 वस्तुओं की दरों पर फैसला टला
Sun, 22 Dec 2024 07:58 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 22 Dec 2024 07:58 AM IST
सार
केंद्रीय वित्त मंत्री ने साफ किया है कि पॉपकॉर्न पर पहले जैसे ही तीन तरह के टैक्स लगते रहेंगे। जीएसटी परिषद की बैठक के बाद फैसला लिया गया है कि अब पुराने वाहन खरीदने पर 18% जीएसटी लगेगा। परिषद ने 148 वस्तुओं की दरों को तर्कसंगत बनाने का फैसला फिलहाल टाल दिया है।
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : एक्स/निर्मला सीतारमण
जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि पहले से पैक और लेबल के साथ पॉपकॉर्न पर 12% का टैक्स लगाया जाएगा। अगर इसमें चीनी मिलाई गई है तो उस पर 18% की दर से जीएसटी जीएसटी लागू रहेगा। इसकी कीमतों पर परिषद अलग से सर्कुलर जारी करेगी। पॉपकॉर्न पर पहले जैसे ही तीन तरह के टैक्स लगेंगे। पहला नमक और मसाले मिलाकर खाने के लिए तैयार किए गए और पैक्ड हैं, लेकिन उन पर कोई लेबल नहीं लगा है। ऐसे पैक्ड पॉपकॉर्न पर 5% जीएसटी लागू होगा। पैकेट पर लेबल भी लगा है तो उस पर जीएसटी बढकर 12 फीसदी हो जाएगा। ये सभी टैक्स पहले से ही लागू हैं, अब इनको स्पष्ट कर दिया गया है। वित्त मंत्री ने मीडिया में दुष्प्रचार से बचने की अपील करते हुए कहा, ये सभी टैक्स पहले से ही लागू हैं। जीएसटी ने अब इन्हें स्पष्ट किया है।
पुराना वाहन खरीदना होगा महंगा...अब 12 के बजाय 18 फीसदी लगेगा जीएसटी
निर्मला सीतारमण
- फोटो : amarujala.com
अगर आप पुराने वाहन खरीदने के इच्छुक हैं, तो अब इस पर 18% जीएसटी देना होगा। पहले यह दर 12% थी। यह तब लागू होगी, जब आप किसी कंपनी से खरीद रहे हैं। जीएसटी केवल खरीद-बिक्री पर होने वाले लाभ पर लगेगा। अगर किसी व्यक्ति से खरीद रहे हैं, तो कोई टैक्स नहीं लगेगा। नए इलेक्ट्रिक वाहन पर पहले की तरह 5% जीएसटी लगेगा। जीएसटी परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्ज की शर्त नहीं मानने वाले ग्राहकों पर बैंक या वित्तीय संस्थान कोई जुर्माना लगाते हैं, तो उस पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : एएनआई
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की शनिवार को जैसलमेर में 55वीं बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि जीवन व स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, विमानन ईंधन व फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर टैक्स कम करने का फैसला जनवरी में होगा।
फूड डिलीवरी एप्स पर कोई फैसला नहीं
फूड डिलीवरी एप्स पर कोई फैसला नहीं
- परिषद ने क्विक कॉमर्स, ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी एप पर जीएसटी लगाने पर विस्तार से चर्चा की, पर कोई फैसला नहीं किया।
- बीमा प्रीमियम के बारे में फैसला मंत्री समूह और बीमा नियामक इरडाई के साथ बातचीत के बाद होगा। इरडाई को अपना प्रस्ताव परिषद को देना होगा। इस पर सभी राज्यों में सहमति नहीं बन पाई।
- पौष्टिक चावल पर 5% टैक्स, किसानों से काली मिर्च, किशमिश की आपूर्ति पर कोई शुल्क नहीं
- 2,000 रुपये से कम भुगतान पर पेमेंट एग्रीगेटर्स को कर से राहत मिलेगी, पर यह राहत पेमेंट गेटवे व फिनटेक सेवाओं को नहीं मिलेगी।
- जीएसटी परिषद ने 2019 के निर्णय के तहत रक्षा क्षेत्र के उपकरणों पर दी जा रही जीएसटी छूट को बरकरार रखा है।
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148 वस्तुओं की दरों को तर्कसंगत बनाने का फैसला टला
जीएसटी परिषद् की बैठक
- फोटो : x.com/@nsitharamanoffc
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की जैसलमेर में शनिवार को हुई बैठक में 148 वस्तुओं की दरों में बदलाव के सुझाव पर भी फैसला टल गया है। इस सिफारिश को परिषद के समक्ष पेश ही नहीं किया गया। मंत्री समूह ने इसी महीने करीब 148 वस्तुओं पर कर दरों में फेरबदल करने पर व्यापक सहमति बनाई थी, जिसमें हानिकारक पेय पदार्थ और तंबाकू उत्पादों जैसी वस्तुओं पर वर्तमान 28 प्रतिशत की तुलना में 35 प्रतिशत अधिक कर लगाना शामिल है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली और राज्य सरकारों के वित्त मंत्रियों वाली परिषद के कुछ सदस्यों ने महसूस किया कि बीमा कराधान के संबंध में अंतिम निर्णय पर पहुंचने से पहले और अधिक विचार-विमर्श की आवश्यकता है। बैठक में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के अलावा गोवा, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, मेघालय, ओडिशा के मुख्यमंत्री, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री भी शामिल थे।
विमानन ईंधन पर नहीं बनी सहमति
विमानन ईंधन पर सभी राज्यों में सहमति न बनने पर इसे एक राष्ट्र एक टैक्स से बाहर रखा गया है। राज्यों का तर्क है कि इससे उनके राजस्व पर असर पड़ सकता है। राज्य झिझक रहे थे, क्योंकि वे इस ईंधन को कच्चे पेट्रोलियम डीजल श्रेणी के रूप में देखते थे, जिससे इसे अलग करना मुश्किल हो जाता था।
निर्यातकों को विशेष राहत
निर्यात से जुड़े उत्पादों पर जीएसटी दरें घटाकर निर्यातकों को प्रोत्साहित किया गया है। मुफ्त वितरण के लिए तैयार किए जाने वाले खाद्य उत्पादों पर जीएसटी दरों को घटाया गया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली और राज्य सरकारों के वित्त मंत्रियों वाली परिषद के कुछ सदस्यों ने महसूस किया कि बीमा कराधान के संबंध में अंतिम निर्णय पर पहुंचने से पहले और अधिक विचार-विमर्श की आवश्यकता है। बैठक में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के अलावा गोवा, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, मेघालय, ओडिशा के मुख्यमंत्री, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री भी शामिल थे।
विमानन ईंधन पर नहीं बनी सहमति
विमानन ईंधन पर सभी राज्यों में सहमति न बनने पर इसे एक राष्ट्र एक टैक्स से बाहर रखा गया है। राज्यों का तर्क है कि इससे उनके राजस्व पर असर पड़ सकता है। राज्य झिझक रहे थे, क्योंकि वे इस ईंधन को कच्चे पेट्रोलियम डीजल श्रेणी के रूप में देखते थे, जिससे इसे अलग करना मुश्किल हो जाता था।
निर्यातकों को विशेष राहत
निर्यात से जुड़े उत्पादों पर जीएसटी दरें घटाकर निर्यातकों को प्रोत्साहित किया गया है। मुफ्त वितरण के लिए तैयार किए जाने वाले खाद्य उत्पादों पर जीएसटी दरों को घटाया गया है।