सौवीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तो शहनाई के उस्ताद बिस्मिल्लाह खां याद आए लेकिन सरकारी नुमाइंदों ने उनके परिवार को भुला दिया है। भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को उनके सौवें जन्मदिन पर संगीत से जुड़े देशभर के कलाकार उन्हें खिराजे अकीदत पेश करेंगे।
चार दिवसीय ‘सुर बनारस’ का आयोजन
संस्कृति मंत्रालय की पहल पर संगीत नाटक अकादमी की देखरेख में यहां नागरी नाटक मंडली में चार दिवसीय ‘सुर बनारस’ का आयोजन किया गया है। चार दिवसीय इस कार्यक्रम में शहनाई, बांसुरी और वायलिन वादन के साथ-साथ ध्रपुद गायन और कथक नृत्य के जरिए देश के नामचीन और उभरते कलाकार शहनाई सम्राट को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
उस्ताद के घर पर सन्नाटा
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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का घर
उस्ताद की याद में काशी में शनिवार से तीन दिन का जो संगीत महोत्सव शुरू हो रहा है उसका न्योता तक उनके घर वालों को नहीं भेजा गया है। शनिवार को जब संवाददाता ने उस्ताद के घर इस खुशखबरी को साझा करने की कोशिश की तब यह हकीकत सामने आई। घरवालों को पता ही नहीं है कि उस्ताद की याद में काशी में इतना बड़ा आयोजन भी होने जा रहा है। सराय हड़हा स्थित उस्ताद के घर पर शुक्रवार की दोपहर सन्नाटा था।
कार्ड भी संगीत नाटक अकादमी की ओर से नहीं आया
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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के परिजन
उनके पोते बंदे अली बैठका में आराम फरमा रहे थे। आवाज लगाने पर दरवाजा खुला। कुछ देर बार उस्ताद के दूसरे पोते नासिर अब्बास आ गए। जब संवाददाता ने उनसे रविवार से नागरी नाटक मंडली के सभागार में उस्ताद की सौंवी जयंती पर होने वाले चार दिनी संगीत महोत्सव की खुशी साझा की तब वह अनजान नजर आए। उनका कहना था कि दादाजान की याद में ऐसे किसी आयोजन की जानकारी उन्हें नहीं है। कार्ड भी संगीत नाटक अकादमी की ओर से नहीं आया है।
अखबारों में छपे विज्ञापन के जरिए जानकारी मिली
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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां क बेटे
काली महाल में रहने वाले उस्ताद के तीसरे पुत्र जामिन हुसैन को भी इस आयोजन के बारे में अखबारों में छपे विज्ञापन के जरिए जानकारी मिली। वह पूछ रहे थे कि वहां तक कैसे पहुंचा जा सकता है। कोई जुगाड़ लगाने की भी वह सोचने लगे। यानी नागरी नाटक मंडली में रविवार से शुरू होने वाले जन्मशती समारोह में उस्ताद की यादें तो होंगी, सरकारी नुमाइंदे होंगे लेकिन उस मौके पर उस्ताद के घर वाले नहीं होंगे। दरअसल इस खास खुशी के मौके पर संगीत नाटक अकादमी ने उत्साद के घर पर न्योता तक नहीं नहीं भिजवाया है। कार्ड भेजना तो दूर किसी ने मुंह से भी नहीं कहा।