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बच्ची का सिर काटने वाले को फांसी, कोर्ट ने बताया क्यों दी ये सजा

Thu, 28 Jul 2016 03:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शाहजहांपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, शाहजहांपुर Updated Thu, 28 Jul 2016 03:39 AM IST
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capital punishment to the killer of ten year old girl
afreen murder case - फोटो : अमर उजाला

किराए पर कमरा न देने पर वर्ष तीन साल पहले घर की 10 साल की बच्ची को फावड़े से काट कर मार देने वाले मामले को विरल से विरलतम श्रेणी का अपराध मानते हुए अपर सत्र न्यायाधीश गोपाल उपाध्याय ने बुधवार को अभियुक्त फिरोज को दोषी करार देते हुए आईपीसी की धारा 302 के तहत मृत्यु दंड की सजा सुनाई। अभियुक्त पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

capital punishment to the killer of ten year old girl
afreen murder case - फोटो : अमर उजाला

50 साल के आरोपी फिरोज ने 2013 में 16 अगस्त की सुबह 7.40 बजे शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन के निकट 10 वर्षीया आफरीन को जमीन पर गिराने के बाद फावड़े से कई वार कर धड़ से सिर को अलग कर दिया था। जलालनगर के मोहल्ला निसरजई निवासी इकरार अली की बेटी आफरीन घटना वाले दिन अपनी चचेरी बहन सात वर्षीया फलक के साथ ढाका तालाब मार्ग से स्कूल जा रही थी। इकरार अपनी बेगम के साथ बच्ची को स्कूल जाते हुए अपने घर के दरवाजे से खड़े होकर देख रहे थे।

capital punishment to the killer of ten year old girl
afreen murder case - फोटो : अमर उजाला

तभी हाजी जाकिर अली की डेरी के सामने फिरोज पुत्र फारूक हाथ में फावड़ा लेकर आता दिखा। उसने आफरीन को रोका और उसके पीठ पर जोर से हाथ मारा। पीठ पर टंगे स्कूली बैग के साथ बच्ची जमीन पर लुढ़की तो फिरोज ने फावड़े से उसकी गर्दन पर एक के बाद एक तीन वार किए जिससे उसका सिर धड़ से अलग होकर कुछ दूरी पर जा गिरा। यह दृश्य देख आसपास के मकानों में रहने वालों ने भी देखा।

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afreen murder case - फोटो : अमर उजाला

बहुचर्चित आफरीन मर्डर केस में बुधवार को सुनाए गए फैसले में अपर सत्र न्यायाधीश अष्टम गोपाल उपाध्याय ने इस घटना को विरल से विरलतम श्रेणी का अपराध मानने की वजहों को भी स्पष्ट किया। उन्होंने लिखा है कि हजारों बच्चे रोज सुबह स्कूल जाते हैं। उनके अंदर व्याप्त भय को दूर करने के लिए ऐसे क्रूर अपराधियों (जो मासूम और असहाय बच्चों को निशाना बनाते हैं) को कठोर सजा देना न्यायालय की जिम्मेदारी है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

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afreen murder case - फोटो : अमर उजाला

ये अपराधी न केवल सिर्फ न्यायिक अंतर्विवेक पर बल्कि समाज के सामूहिक अंतर्विवेक को भी आघात पहुंचाते हैं। अत: वाद के तथ्यों, हालातों और सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्थाओं के प्रकाश में यह हत्या विरल से विरलतम अपराध की श्रेणी में आती है। न्यायाधीश ने अपने फैसले में लिखा है कि घटना के समय अभियुक्त फिरोज 47 साल का रहा होगा। वह किशोर या जवानी की अवस्था का नहीं बल्कि पूर्ण परिपक्व और अब 50 साल का व्यक्ति है।

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