पहले कार्यकाल में राष्ट्रपति का वेतन 10,000 रुपये हुआ करता था। राजेंद्र प्रसाद महज 5,000 रुपये ही बतौर वेतन लेते थे। अपने कार्यकाल के अंत में तो वे केवल 2,500 रुपये ही लेने लगे थे। वे, इतने सादगी पसंद थे कि अपने सारे काम स्वयं करते थे। अपने लिए, उन्होंने केवल एक सहायक रखा था। वे किसी तरह के तोहफे कुबूल नहीं करते थे।
आजादी का अमृत महोत्सव : सादगी पसंद डॉ. राजेंद्र प्रसाद लेते थे सिर्फ आधी तनख्वाह
हरिश्चंद्र सिंह, डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेई से लौटकर
Published by: योगेश साहू
Updated Sun, 02 Jan 2022 05:43 AM IST
सार
देश को बनाने में जिन्होंने अपना जीवन दिया, उनकी विरासत और स्मृतियों से पाठकों को रूबरू कराने की कड़ी में पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, गोपीनाथ बारदोलोई, सर्वपल्ली राधाकृष्णन और वीर सावरकर के जन्मस्थान से रिपोर्टें पढ़ीं। आधुनिक भारत के शिल्पियों से जुड़े इन तीर्थस्थलों की गाथाओं की कड़ी में इस बार पेश है डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली की कहानी...
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