संसद के विशेष सत्र के तीसरे दिन लोकसभा में 'नारी शक्ति वंदन विधेयक’लंबी बहस के बाद आखिरकार पास हो गया। इसके पक्ष में 454 वोट पड़े। इस विधेयक का विरोध सिर्फ दो लोगों ने किया। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में विधेयक पेश किया था। लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के बाद 27 महिला सांसदों ने समर्थन किया। वर्तमान में लोकसभा में 82 महिला सांसद हैं। हालांकि इन सांसदों ने बिल में ओबीसी, एससी-एसटी कोटा शामिल करने और बिना किसी देरी इसे लागू करने की मांग की।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम: 27 महिला सांसदों ने लोकसभा में हुई बहस में लिया हिस्सा; गिनाए बिल के नफा-नुकसान
लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के बाद 27 महिला सांसदों ने समर्थन किया। वर्तमान में लोकसभा में 82 महिला सांसद हैं। हालांकि इन सांसदों ने बिल में ओबीसी, एससी-एसटी कोटा शामिल करने और बिना किसी देरी इसे लागू करने की मांग की।
‘ये मेरे जीवनसाथी राजीव गांधी का सपना था’- सोनिया गांधी
लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक यानी नारी शक्ति वंदन विधेयक पर बहस के दौरान कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि ये मेरे पति राजीव गांधी का सपना था। इसके साथ ही उन्होंने जाति जनगणना की मांग भी की। सोनिया गांधी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की तरफ मैं नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के समर्थन में खड़ी हुई हूं। कांग्रेस नेता सोनिया ने कहा कि अध्यक्ष महोदय, खुद मेरी जिंदगी का यह बहुत मार्मिक क्षण है। पहली दफा स्थानीय निकायों में स्त्री की भागीदारी तय करने वाला संविधान संशोधन मेरे जीवन साथी राजीव गांधी ही लाए थे, लेकिन राज्यसभा में सात वोटों से गिर गया था। बाद में, प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव जी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने ही उसे पारित कराया। आज उसी का नतीजा है कि देशभर के स्थानीय निकायों के जरिए हमारे पास 15 लाख चुनी हुई महिला नेता हैं। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी का सपना अभी तक आधा ही पूरा हुआ है। इस विधेयक के पारित होने के साथ ही वह पूरा होगा।
इस दौरान उन्होंने कहा, ‘मैं एक सवाल पूछना चाहती हूं कि पिछले 13 वर्षों से भारतीय स्त्रियां अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी का इंतजार कर रही हैं और अब उन्हें कुछ वर्ष और इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है। कितने वर्ष- 2, 4, 6 या 8 वर्ष ? क्या भारत की महिलाओं के साथ यह बर्ताव उचित है?
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार को महिला आरक्षण विधेयक के भीतर आरक्षण तत्काल लागू करने की मांग को लेकर विपक्ष की आलोचना की। साथ ही पूछा कि 'क्या यह विपक्षी नेताओं की इच्छा है कि संवैधानिक प्रक्रिया का पालन न किया जाए? क्या हमें संविधान का पालन नहीं करना चाहिए? क्या विपक्षी दलों ने यही रुख अपनाया है?
वहीं, लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले ने इस कानून को 'पोस्ट डेटेड चेक' बताया। उन्होंने मांग की कि सरकार इसे लागू करने की तारीख और समयसीमा बताए। सुले ने 128वें संविधान संशोधन विधेयक 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को मंजूरी देने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को लेकर सवाल उठाया जबकि जनगणना और परिसीमन के बिना इसे लागू नहीं किया जा सकता।
विधेयक पर बहस के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने महिला आरक्षण विधेयक को दिखावा करार दिया। उन्होंने बुधवार को कहा कि इसका नाम बदलकर महिला आरक्षण पुनर्निर्धारण विधेयक किया जाना चाहिए। मोइत्रा ने कहा कि महिला आरक्षण दो पूरी तरह अनिश्चित तिथियों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, यह मेरे लिए गर्व और शर्म का विषय है। गर्व यह है कि मैं यहां भारतीय संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर बोल रही हूं। मैं अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस से हूं, एक ऐसी पार्टी जिसने अपने सदस्यों में से 37 फीसदी महिलाओं को संसद में भेजा। लेकिन मैं एक ऐसी लोकसभा से हूं, जिसमें कुल मिलाकर केवल 15 फीसदी महिलाएं हैं, जो 26.5 फीसदी के वैश्विक औसत से बहुत कम है और 21 फीसदी के एशियाई क्षेत्रीय औसत से भी नीचे है।