विष्णु पुराण (Vishnu Puran) में अब तक आपने देखा, ब्रह्मा से वर पाकर हिरण्यकश्यपु खुद को सर्वश्रेष्ठ मानने लगता है। वह स्वयं को ईश्वर समझने लगता है। लेकिन उसकी गर्भवती पत्नी कयादु का देवराज इंद्र अपहरण कर ले आते हैं। हिरण्यकश्यपु का पुत्र माता के गर्भ में ही भगवान विष्णु की भक्ति करता है।
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विष्णु पुराण
- फोटो : सोशल मीडिया
बीते रोज प्रसारित हुए एपिसोड में आपने देखा असुर राज हिरण्यकश्यपु अपनी कयादु को फिर से पाकर प्रसन्न हो जाता है। इस बीच हिरण्यकश्यपु को ये पता ही नहीं होता कि भगवान विष्णु से घृणा करने वाले के घर ही उनका सबसे बड़ा प्रेमी जन्म लेने वाला है। इधर हिरण्यकश्यपु इंद्र से सत्ता छीन लेता है और इंद्रलोक में कब्जा जमा लेता है।
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सत्ता के मद में चूर होकर हिरण्यकश्यपु उसका आंनद लेता है, इधर उसकी पत्नी कयादु को प्रसवपीड़ा होती है। असुरराज के घर परम विष्णु भक्त प्रह्लाद का जन्म होता है। पुराणों के अनुसार नारद ने ही भक्त प्रह्लाद, भक्त अम्बरीष और ध्रुव जैसे भक्तों को उपदेश देकर भक्तिमार्ग में प्रवृत्त किया था।
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कयादु और हिरण्यकश्यपु का पुत्र प्रह्लाद नारदमुनि के साथ रहते हैं। हिरण्यकश्यपु नारद मुनि से ये वचन लेता है कि वह विष्णु का नाम उसके बेटे के सामने नहीं लेंगे। क्योंकि वह भगवान विष्णु को अपना सबसे बड़ा शत्रु मानता है।
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आश्रम में ही नारद मुनि कयादु और गर्भस्थ शिशु को ईश्वर भक्ति के संस्कार दे चुके होते हैं। प्रह्लाद के बारे में कहते हैं कि उन्होंने मां के गर्भ में ही भक्ति के संस्कार ग्रहण कर लिए थे। नारद जैसे परम भागवत का सान्निध्य मिलने पर दैत्यकुल में जन्म लेते हुए भी प्रह्लाद बचपन से ही भक्त हो गए।