अभिनेता शशि कपूर का जन्म 18 मार्च 1938 के दिन कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था। शशि कपूर का असली नाम बलबीर राज पृथ्वीराज कपूर था। तीनों भाइयों में शशि कपूर सबसे छोटे थे। मां को उनको असली नाम पसंद नहीं आया तो उन्होंने प्यार से उन्हें शशि कहकर बुलाना शुरू किया और यहीं से उनका नाम शशि कपूर हो गया। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2011 में पद्म भूषण और 2014 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया। आज शशि कपूर के जन्मदिन पर आइए जानते हैं, उनके करियर की 10 प्रमुख फिल्मों के बारे में..
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जब जब फूल खिले
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म : जब जब फूल खिले (5 नवंबर 1965)
सूरज प्रकाश के निर्देशन में बनी फिल्म 'जब जब फूल खिले' में शशि कपूर और नंदा की लीड भूमिका रही। फिल्म में एक अमीर लड़की, एक गरीब लड़के के प्यार में पड़ जाती है, और लड़की के पिता को उनका प्यार मंजूर नहीं है। शशि कपूर ने इस फिल्म में राज कुमार की भूमिका निभाई थी और नंदा ने रीता खन्ना की भूमिका निभाई थी। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सिल्वर जुबली मनाई और 1965 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक बन गई और साथ ही शशि कपूर की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक बन गई। इस फिल्म का गीत 'परदेसियों से ना अंखिया मिलाना' जबरदस्त हिट हुआ था। इसी फिल्म से शशि कपूर हिंदी सिनेमा में स्थापित हुए।
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हसीना मान जाएगी
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फिल्म : हसीना मान जाएगी (1 जनवरी 1968)
फिल्म 'हसीना मान जाएगी' में शशि कपूर ने दोहरी भूमिका निभाई थी। शशि कपूर के अपोजिट बबीता थीं। प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी इस फिल्म के सभी गाने हिट थे। खासकर मो. रफी और लता मंगेशकर की आवाज में फिल्माया गाना 'बेखुदी में सनम, उठ गये जो कदम' काफी लोकप्रिय हुआ था। जो आज भी लोगों की जुबान पर है। इसी शीर्षक पर बाद में डेविड धवन ने भी फिल्म बनाई थी।
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कन्यादान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म : कन्यादान (9 अगस्त 1968)
फिल्म 'कन्यादान' मोहन सहगल के निर्देशन में बनी सामाजिक रोमांटिक ड्रामा फिल्म फिल्म थी। फिल्म की कहानी बाल विवाह जैसे सामाजिक मुद्दे के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई थी कि बचपन में की गई शादी असली शादी नहीं होती है। और, असली कन्यादान वह होता है जब माता -पिता बेटी के वयस्क हो जाने पर उसकी सहमति से उनके लिए वर चुने। इस फिल्म में शशि कपूर ने अमर और आशा पारेख ने रेखा की भूमिका निभाई थी।
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एक श्रीमान एक श्रीमती
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फिल्म : एक श्रीमान एक श्रीमती (31 दिसंबर 1968)
फिल्म 'एक श्रीमान एक श्रीमती' का निर्माण अनिल कपूर के पिता सुरिंदर कपूर ने किया था। भप्पी सोनी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शशि कपूर और बबीता की अहम भूमिका थी। फिल्म में शशि कपूर ने प्रीतम और बबीता कपूर ने दीपाली की भूमिका निभाई थी। प्रीतम को दीपाली से प्रेम हो जाता है जो पहले से अजीत( प्रेम चोपड़ा)को अपने जीवन साथी के रूप में चुन चुकी है। दीपाली के चाचा का दिल जीतकर प्रीतम कैसे उनके करीब पहुंचता है और दीपाली का प्यार जीत लेता है, इसी के इर्द -गिर्द फिल्म की कहानी घूमती है। यह फिल्म साल की सफल फिल्म रही है।