Movie Review: तैश
कलाकार: जिम सरभ, पुलकित सम्राट, हर्षवर्धन राणे, संजीदा शेख, कृति खरबंदा, अभिमन्यु सिंह, अंकित राठी, अरमान खेड़ा आदि।
निर्देशक: बेजॉय नांबियार
ओटीटी: ZEE5
रेटिंग: ****
कोरोना संक्रमण काल ने हिंदी सिनेमा को तमाम दुख दिए हैं लेकिन, इस दौरान कुछ ऐसी चीजें भी हुई हैं जो आने वाले दिनों में सिनेमा में इतिहास के तौर पर दर्ज रहेंगी। इस इतिहास का एक अनोखा अध्याय लिखा है लेखक- निर्देशक बेजॉय नांबियार ने अपनी नई फिल्म ‘तैश’ में। फिल्म ‘तैश’ को वेब सीरीज की तरह भी रिलीज किया गया है। सीरीज के छह एपिसोड करीब तीन घंटे के हैं और फिल्म उससे कहीं कम। दिलचस्प पहलू यहां ये है कि आप किसी को भी पहले देखें, दूसरे को देखने के आकर्षण से आप खुद को रोक नहीं पाएंगे। यही बेजॉय की स्टोरीटेलिंग की असली जीत है।
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तैश
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
बेजॉय के बारे में हिंदी पट्टी के दर्शकों को ज्यादा पता नहीं रहा है। सोनी पिक्स की प्रतियोगिता ‘गेटवे टू हॉलीवुड’ जीतकर फिल्म निर्माताओं के रडार पर आए बेजॉय को मैं नई पीढ़ी का ऐसा निर्देशक मानता रहा हूं जो विश्व सिनेमा में किसी भी देश के फिल्ममेकर्स की स्टोरीटेलिंग का मुकाबला कर सकता है। अपनी कला पर पकड़ की उनकी नई बानगी है फिल्म ‘तैश’। ‘शैतान’, ‘डेविड’ और ‘वजीर’ के बाद बेजॉय की कहानी के सारे किरदार वाकई तैश में हैं। कहानी पूरी की पूरी लंदन और उसके आसपास घटती है। लंदन में पंजाबी समुदाय का अपना अलग रौला रहता है। इसी समुदाय का कुलजिंदर वहां अपना नंबर दो का कारोबार खड़ा कर चुका है। दोनों भाई पाली और जस्सी उसके दाएं और बाएं हाथ हैं। इन तीनों भाई की चाल उस रास्ते को क्रॉस कर जाती है जिस पर बनी हवेली में एक बहुत बड़े हेल्थ कारोबारी के बेटे की शादी की तैयारियां चल रही हैं। अतीत का एक किस्सा इस परिवार के बड़े बेटे के लिए सदमा बनकर लौटता है और इसके बाद जो होता है, वह धमाका दर धमाका है।
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- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘तैश’ का टीजर और फिर ट्रेलर जब से रिलीज हुआ, लोगों को इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार रहा। बेजॉय के प्रशंसक कुछ डरे सहमे भी दिखे क्योंकि अक्सर जिन फिल्मों के ट्रेलर उम्मीद से ज्यादा शानदार होते रहे हैं, वे फिल्में अपने ट्रेलर की कसौटी पर ही फेल हो जाती रही हैं। पर बेजॉय की टीम ने यहां अपने कैप्टन का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। खासतौर से फिल्म का पोस्ट प्रोडक्शन संभालने वाली टीम ने बेहतरीन काम किया है। फिल्म के निर्देशक के तौर पर बेजॉय ने यहां एक ऐसी कहानी चुनी है जिसमें हर किरदार अधूरा है। न तो किसी की शख्सियत संपूर्ण है और न ही किसी में ऐसी कोई ख्वाहिश ही है। सबके अपने अपने अतीत हैं और सब वर्तमान में एक दूसरे से लड़ने के साथ साथ अपने भीतर अपने आप से लड़ रहे हैं। कहानी भी कभी आज में तो कभी 10, आठ और दो बरस पहले जाकर अपने से ही लड़ती रहती है। इस कहानी को कहने के लिए बेजॉय ने हिंदी सिनेमा के हाशिए पर खड़े आधा दर्जन कलाकार लिए और उन्हें इस फिल्म से स्टार बना दिया है।
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फिल्म ‘तैश’ अभिनय के लिहाज से किसी एक कलाकार की फिल्म नहीं है। जब लगता है कि जिम सरभ बतौर जूनियर कलाकार सबसे आगे निकल जाएंगे तो कहानी में सनी लालवानी यानी पुलकित फिर से लौट आते हैं। जिम सरभ की यहां दाद देनी होगी कि उन्होंने अप्रत्याशित तरीके से पूरी कहानी का लंगर बनकर उसे साधे रखा है। उनकी इसी साधना के इर्दगिर्द बाकी कलाकार नाचे हैं। अभिमन्यु सिंह इस तरह के किरदार पहले भी कर चुके हैं, लेकिन इस बार बीवी के साथ साथ साली को भी हड़पने वाले बड़े भाई के किरदार में उन्होंने अलग असर छोड़ा। अपने अपाहिज साले का मजाक उड़ाने वाला जीजा जब उसी की गति को प्राप्त होता है तो उन दृश्यों में अभिमन्यु की लाचारी असर करती है।
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- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म एक तरह से हर्षवर्धन राणे की शो रील की तरह भी बनी है। तेलुगु सिनेमा में बड़ा नाम बन चुके राणे ने हिंदी सिनेमा मे जो हुनर इस बार दिखाया है, वह उनकी ‘सनम तेरी कसम’ और ‘पलटन’ की विफलताएं भुला देगी। वहीं, पुलकित सम्राट का किरदार उस पत्थऱ की तरह है जो पानी के जरा सा भी ठहरते ही उसमें गिरकर हलचल मचा देता है। अपने दोस्त के साथ बचपन में हुए अत्याचार का बदला लेने निकले सनी का तैश देखने लायक है। इन दमदार अभिनेताओं के साथ साथ बेजॉय नांबियार ने अपनी फिल्म में दो ऐसी अभिनेत्रियों का भी दमखम उस हिंदी सिनेमा को दिखाया है जहां महिला किरदारों को लिखने पर ज्यादा मेहनत की नहीं जाती।