डिजिटल रिव्यू: ऑपरेशन कोबरा
कलाकार: गौतम गुलाटी, रूही सिंह, तरुण खन्ना, नायरा बनर्जी आदि। निर्देशक: मुनेश रावत
ओटीटी: ईरॉस नाउ
मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों यूं लग रहा है कि जैसे ओटीटी सीरीज की रेस शुरू हो चुकी है। थोक के भाव सीरीज बन रही हैं और जिसको जो मिल जा रहा है, विदेशी वेब सीरीज से उठाकर हिंदुस्तानी दर्शकों को चेप दे रहा है। लेकिन ये ओटीटी प्लेटफॉर्म ये नहीं सोच पा रहे कि बीते साल जिन दर्शकों ने शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान की फिल्मों को दो कौड़ी का साबित कर दिया, उनके सामने नए चेहरों को लेकर बनी इन फास्टफूड जैसी वेब सीरीज कहां टिकेंगी भला?
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Operation Cobra
- फोटो : social media
इंटरनेशनल कंपनी ईरॉस को अपने शेयर भाव टिकाए रखने के लिए झोला भर भरकर कंटेंट चाहिए। शेयर बाजार से पैसा उठाने वाली कंपनी के साथ दिक्कत यही होती है कि उसे अपने शेयर धारकों से किए वादे को पूरा करने के लिए एक तय संख्या में कंटेंट बनाना ही होता है और जब कंटेट बनाने का पैमाना कहानी नहीं शेयर भाव हो तो फिर ऑपरेशन कोबरा जैसी सीरीज ही बन सकती है।
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मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में हाल के दिनों में बनी वेब सीरीज में ऑपरेशन कोबरा की गिनती सबसे नीचे के पायदान पर हो सकती है। सीरीज में स्पेशल इफेक्ट्स पर ही पूरा दारोमदार है और सीरीज की सबसे कमजोर कड़ी यही है। एक विदेशी आतंकी संगठन से भिड़ते एक रॉ एजेंट की कहानी बनाने वालों को ये भी नहीं पता है कि रॉ का काम क्या है और इसमें काम करने वाले फील्ड में रहते कैसे हैं? ये अमेरिका की एफबीआई नहीं है। सुरक्षा और फर्ज जैसी हिंदी फिल्मों के दौर की दिखती इस वेब सीरीज में कुछ भी ऐसा नहीं है कि आप इसका एक एपीसोड भी बिना कसमसाए देख सकें।