जैसा कि सनी देओल की नई फिल्म ‘जाट’ का ट्रेलर भी कहता है, उनके ढाई किलो के हाथ का अंदाजा पहली बार साउथ सिनेमा को भी होने जा जा रहा है। ‘पुष्पा’ और ‘पुष्पा 2’ बनाने वाली कंपनी मैत्री मूवी मेकर्स ने सनी देओल के साथ फिल्म ‘जाट’ में हाथ मिलाया है। फिल्म जल्द रिलीज होने वाली है। इसके अलावा सनी देओल अपनी नई फिल्मों ‘लाहौर 1947’, ‘बॉर्डर 2’ और ‘रामायण’ को लेकर भी खासे उत्साहित हैं। अपने डबिंग स्टूडियो सनी सुपर साउंड के लाउंज में अभिनेता सनी देओल ने ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल से की ये एक खास मुलाकात।
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सनी देओल
- फोटो : अमर उजाला
दक्षिण के निर्माताओं का उत्तर के कलाकारों के साथ संगम तो पहले भी होता रहा है लेकिन ‘जाट’ को एक साथ हिंदी, तमिल, तेलुगू आदि भाषाओं में भी रिलीज किया जा रहा है। कितनी उम्मीद है इस नए प्रयोग से?
मैत्री मूवी मेकर्स वाले ये फिल्म बना रहे हैं। फिल्म के निर्देशक गोपीचंद मलिनेनी मेरे पास पहले जो कहानी लेकर आए थे, वह मुझे पसंद नहीं आई लेकिन जब ये ‘जाट’ का विषय लेकर वह मेरे पास आए तो मुझे ये बहुत ही प्यारा लगा। और, जैसा प्यार फिल्म के ट्रेलर को मिल रहा है, उससे भी लगता है कि मेरा चुनाव सही रहा।
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सनी देओल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हां, इस बार हैंडपंप की जगह आपने पंखा उखाड़ दिया है..
इसमें मेरा नहीं मेरी इमेज का ज्यादा कसूर है। मेरी इमेज बन गई है परदे पर ऐसी कि सनी देओल है तो हाथ में जो आएगा, उखड़ ही जाएगा। ये एक तरह से मेरी शख्सियत की अब जिम्मेदारी या कहें कि उत्तरदायित्व भी बन गया है। जब तक इस तरह के विषय मेरे पास आते रहेंगे, लोगों का मनोरंजन होता रहेगा।
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सनी देओल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मैत्री मूवी मेकर्स का आपने नाम लिया, उनकी ‘पुष्पा’ और ‘पुष्पा 2’ ब्लॉकबस्टर फिल्में रही हैं, उनकी इस पहल का भाषा की दूरियां मिटाने में कितना हाथ रहेगा?
मेरा मानना है कि इससे एक काम और जो होगा, वो ये कि अब हमारी फिल्में साउथ में डब होकर और बड़े रिलीज होने लगेंगी। वहां की डब फिल्में तो हिंदीभाषी लोग खूब देखते रहे हैं, लेकिन हिंदी फिल्में उतने बड़े पैमाने पर डब होकर वहां रिलीज नहीं होती रही हैं। अब हिंदी के कलाकारों के साउथ सिनेमा की मुख्यधारा की सिनेमा करने से हमारी फिल्मों की पहुंच भी वहां बढ़ेगी। मेरा मानना है कि ‘गदर 2’ को साउथ की भाषाओं में डब करके रिलीज करना चाहिए था।
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सनी देओल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
साउथ सिनेमा के निर्देशक और एक्शन डायरेक्टर्स की सोच तक अभी तक हिंदी सिनेमा नहीं पहुंच पा रहा है, इसकी वजह क्या मानते हैं आप?
फिल्म ‘जाट’ के जो तकनीशियन हैं, सब शूटिंग के समय मेरी पुरानी फिल्मों की बाते करते रहते हैं। सबने मेरी फिल्में ‘घातक’ आदि खूब देखी हैं। उन्होंने हिंदी के अलावा दुनिया भर का सिनेमा देखा है और तकनीकी रूप से खूब तरक्की भी की है। उनकी सोच भी लगातार बदलती रही है। हिंदी सिनेमा का सोच और तकनीक, दोनों स्तर पर विकास रुका हुआ है।