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Sheetal Sharma Interview: मेरा बस चले मैं हर हीरोइन को बस साड़ी ही पहनाऊं, श्रीदेवी, मधुबाला को सजाने की हसरत

Tue, 18 Feb 2025 08:56 PM IST
तनु चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: तनु चतुर्वेदी Updated Tue, 18 Feb 2025 08:56 PM IST
सार

‘छावा’ के निर्देशक लक्ष्मण उतेकर ने वेशभूषा संयोजक शीतल इकबाल शर्मा को इस फिल्म के कॉस्ट्यूम डिजाइन करने के लिए चुना। फिल्म ‘छावा’ की कामयाबी के बाद से शीतल को खूब बधाइयां मिल रही हैं।

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Chhaava Costume Desginer Sheetal Iqbal Sharma Exclusive Interview with Amar Ujala Chhaava Miss Lovely Don 2
शीतल इकबाल शर्मा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फिल्म ‘छावा’ के निर्देशक लक्ष्मण उतेकर उन चंद फिल्म निर्देशकों से हैं, जो कला के सामूहिक विकास में यकीन रखते हैं। सामूहिक विकास मतलब टीम को साथ लेकर उनके विकास की कोशिशें करना और इसमें फिर टीम लीडर का विकास हो ही जाता है। अपने करियर की सबसे बड़ी फिल्म ‘छावा’ के लिए वह चाहते तो किसी भी कॉस्ट्यूम डिजाइनर को अपने साथ ला सकते हैं, लेकिन उन्होंने भरोसा किया अपनी फिल्मों ‘मिमी’ और ‘जरा हटके जरा बचके’ के वेशभूषा संयोजक शीतल इकबाल शर्मा पर और वह भी यही कहते हैं कि टीम को आगे लेकर चलना बहुत जरूरी है, आप टीम को आगे बढ़ाते रहिए, आप आगे खुद ब खुद बढ़ जाएंगे। फिल्म ‘छावा’ की कामयाबी के बाद से शीतल को खूब बधाइयां मिल रही हैं, उनसे ‘अमर उजाला’ की एक एक्सक्लूसिव मुलाकात। 

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Chhaava Costume Desginer Sheetal Iqbal Sharma Exclusive Interview with Amar Ujala Chhaava Miss Lovely Don 2
शीतल इकबाल शर्मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म छावा पर बात करने से पहले थोड़ी बात आपकी करते हैं, आपने कॉस्ट्यूम डिजाइन कॉलेज में सीखा है या दूसरों के साथ काम करके?
मैं मुंबई से कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग की पढ़ाई करने ही ब्रिटेन गया था। वीगन ली से मैंने ग्रेजुएशन किया और फिर फिर पोस्ट-ग्रेजुएशन के लिए लंदन चला गया। ये उन दिनों की बात है जब दुनिया भर में आर्थिक मंदी का पहला झटका आया। लोगों की नौकरियां जा रही थीं, और मैं नया काम तलाश रहा था। आर्थिक मंदी के कारण लंदन में काम नहीं मिला और मैं 2009 में मुंबई लौट आया। लंदन में पढ़ाई के दौरान मैंने प्राचीन भारतीय कला, फ्रेंच रिवेरा जैसी अलग-अलग आर्ट फॉर्म्स पर रिसर्च की थी। यह रिसर्च हिंदी फिल्मों में बहुत काम आई।

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शीतल इकबाल शर्मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिर, पहला ब्रेक कैसे मिला हिंदी सिनेमा में?
जैसा कि हर हुनर में होता है जिम्मेदारी का बड़ा काम पाने से पहले खुद को साबित करना जरूरी है। मैंने भी फिल्म ‘डॉन 2’ के कॉस्ट्यूम डिजाइनर जैमल ओदेद्रा के साथ सहायक के रूप में काम किया। उन दिनों मैंने खूब मेहनत की। दिन रात बस काम की धुन सवार रहती। मेरे सीनियर ने ही मुझे निर्देशक आसिम अहलूवालिया से मिलवाया, जो उस समय  नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ ‘मिस लवली’ बना रहे थे। इस फिल्म को कई फिल्म फेस्टिवल्स में सराहा गया और देखा जाए तो यहीं से मेरे करियर की शुरुआत हुई।

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Chhaava Costume Desginer Sheetal Iqbal Sharma Exclusive Interview with Amar Ujala Chhaava Miss Lovely Don 2
शीतल इकबाल शर्मा ने डिजाइन किए 'छावा' के कॉस्ट्यूम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आपने आसिम अहलूवालिया, निखिल आडवाणी, अमर कौशिक, इम्तियाज अली जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया है, फिल्म छावा का काम मिलने पर पहली चुनौती क्या समझ आई?
‘छावा’ के पहले मैं लक्ष्मण उतेकर के साथ ‘मिमी’ और ‘जरा हटके जरा बचके’ कर चुका था। जब लक्ष्मण उतेकर ने ‘छावा’ की कहानी सुनाई, तो बस यही कहा कि इस फिल्म के कॉस्ट्यूम्स ऐसे होने चाहिए कि मराठा संस्कृति की झलक मिले और दर्शकों को गर्व महसूस हो। निर्देशक ने मुझे पूरी क्रिएटिव फ्रीडम दी, इससे मेरा काम बेहतर हुआ। वैसे भी पीरियड फिल्मों में रिसर्च करना मुझे बहुत पसंद है। 

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शीतल इकबाल शर्मा ने डिजाइन किए 'छावा' के कॉस्ट्यूम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

तो छावा के कॉस्टयूम बनाने के लिए तो खूब रिसर्च चली होगी, क्या संदर्भ बिंदु रहे आपके या आपकी टीम के?
फिल्म ‘छावा’ के लिए कॉस्टयूम रिसर्च में लगभग चार महीने लगे। 1680 के संभाजी साम्राज्य से जुड़े ज्यादा रेफरेंस उपलब्ध नहीं थे, लेकिन मुगलों से जुड़े मिनिएचर पेंटिंग्स और अन्य सामग्री आसानी से मिल जाती थी। हमारी टीम ने पुणे के केलकर म्यूजियम, गुजरात, औरंगाबाद, नासिक,कोल्हापुर, रायगढ़ किला जैसे कई जगहों का दौरा किया। वहां पुराने लोगों से बातचीत मिलकर बातचीत की और शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज से जुड़ी पेंटिंग और मूर्तियों का अध्ययन किया। मूर्तियों और पेंटिंग के टेक्सचर और उनके  कलर को भी काफी ध्यान में रखा गया। जितना हो सके, हमने चित्ताकर्षक रंग ही रखे हैं।

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शीतल इकबाल शर्मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आपने तो अमर सिंह चमकीलागंगूबाई काठियावाड़ीएनिमलइमरजेंसी और दो पत्ती जैसी चुनौतीपूर्ण फिल्मों के भी कॉस्ट्यूम डिज़ाइन किए हैं, उनकी तुलना में छावा की तैयारी में कितना वक्त लगा?
ये सबसे ज्यादा चुनौती वाला काम रहा हमारा। संभाजी महाराज, येसुबाई और औरंगजेब के कॉस्ट्यूम तैयार करने में ही आधा साल लग गया। हर डिटेल पर बारीकी से काम हुआ। मेरी टीम के करीब 10 लोग हैं। इनके अलाव एक ज्वेलरी टीम भी थी जिन्हें मैं जयपुर और कोलकाता से लेकर आए। वेशभूषा के सारे कपड़े मसलन, अंगरखा, पगड़ी, जूते आदि सभी के पहले कागजों पर रेखाचित्र बनाए गए। फिर इन्हें बनाने का कपड़ा, चमड़ा आदि चुना गया। कढ़ाई करवाई गई। रंग रोगन कराया। विक्की कौशल के कुछ कॉस्ट्यूम्स का वजन 18-20 किलो तक था और एक्शन सीन्स के लिए कॉस्ट्यूम्स 22-25 किलो तक के थे। शूटिंग के दौरान कॉस्ट्यूम्स को संभालना मुश्किल था, लेकिन स्क्रीन पर यह चीज कभी नजर नहीं आई।
 

 

 

 

 

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शीतल इकबाल शर्मा ने डिजाइन किए 'छावा' के कॉस्ट्यूम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

और, फिल्म छावा में जहां जहां सैकड़ों की तादाद में कलाकार दिख रहे हैं, तो उन्हें तैयार करने में भी तो चुनौतियां आई होंगी?
इतने बड़े स्केल की फिल्म में कॉस्ट्यूम से जुड़ी परेशानियां आना लाजमी था। एक्शन सीन में 3000 से 5000 जूनियर आर्टिस्ट्स होते थे, जिनके लिए अलग-अलग कॉस्ट्यूम तैयार करना ओर उन्हे समय पर तैयार करना काफी चुनौतीपूर्ण था। डायरेक्टर को अगर सवेरे का शॉट सात बजे लेना है तो इसके लिए टीम को सुबह कह लीजिए या रात के 2:30 बजे से ही सभी को उठाकर समय से ऑन सेट रेडी करना पड़ता था। कॉस्टयूम और एक्सेसरीज़ के टूटने की समस्या को ध्यान में रखते हुए हर चीज के 10 -15 डुप्लीकेट तैयार किए गए। 

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'धाकड़' के सेट पर कंगना रनौत के साथ शीतल इकबाल शर्मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

भारतीय परिधानों पर काम करते समय आपका उत्साह कैसा रहता है?
मेरा बस चले तो मैं हर हीरोइन को बस साड़ी ही पहनाऊं। आज की जनरेशन अपने कल्चर से दूर हो रही है, इसलिए मैं कोशिश करता हूं कि ज्यादा से ज्यादा साड़ी को प्रमोट करूं। इस बारे में मुझे संजय लीला भंसाली के साथ काम करते वक्त उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला। मेरी रोल मॉडल तो भानु अथैया ही रही हैं। ‘गांधी’ में भारतीय परिधानों का जो रुआब उन्होंने रचा, उसके आगे उनको मिला ऑस्कर भी फीका है। लेकिन आपको शायद पता नहीं होगा कि मशहूर अभिनेत्री डॉली अहलूवालिया भी कमाल की कॉस्ट्यूम डिजाइनर हैं।

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शीतल इकबाल शर्मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अपने समकालीन किसी कॉस्ट्यूम डिजाइन का काम आप लगातार देखते हैं, आपको लगता है कि ऐसा कोई भारतीय कॉस्ट्यूम डिजाइनर अब है जो ऑस्कर ला सकता हो?
ऑस्कर के लिए तो तुरंत किसी का नाम बता पाने की सूरत में मैं नहीं हूं। बहुत सारे लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। सिनेमा जितना अपनी धरती के करीब रहेगा, उसमें वेशभूषा के रंग, तेवर उतने ही और अच्छे दिखेंगे। समकालीन हुनरमंदों में मुझे कॉस्ट्यूम डिजाइनर वीरा कपूर का काम अच्छा लगता है, उन्होंने ‘सरदार उधम’, ‘कला’ और ‘बुलबुल’ जैसी फिल्में की हैं।
 

 

 

 

 

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शीतल इकबाल शर्मा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सिनेमा के अलावा और क्या पसंद है? यदि किसी पुराने कलाकार के लिए परिधान बनाने का मौका मिलता तो वे कौन से कलाकार होते?
मुझे दुनिया भर का सिनेमा देखना पसंद है। खासतौर से बीती सदी के पांचवें दशक से लेकर आठवें दशक तक की फिल्में मैं खूब देखता हूं, इसमें भी विश्व सिनेमा ज्यादा। आपको ये जानकर हैरानी हो सकती है लेकिन बीते एक दशक से मेरे घर में टेलीविजन नहीं है। हम लोग खूब मन लगाकर काम करते और काम से आने के बाद साथ में समय व्यतीत करते हैं। रही बात हिंदी सिनेमा की विशलिस्ट की तो अमिताभ बच्चन सर और विद्या बालन के लिए कॉस्टयूम डिजाइन करने की हसरत है। टाइम मशीन होती तो मैं अतीत में जाकर देव आनंद, मीना कुमारी, श्रीदेवी, साधना और मधुबाला के लिए कॉस्टयूम डिजाइन करना चाहता।

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